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BJP नेता पंकज चौधरी का 'राहत रूह' अगर सही है, तो 'लकी हेयर ड्रेसर' गलत कैसे है?

Muslim Shop Names Controversy: उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी समेत कई हिंदू बिजनेसमैन मुस्लिम नामों से बिज़नेस चलाते हैं, फिर भी हिंदू संगठन मुस्लिम व्यापारियों को निशाना बना रहे हैं और परेशान कर रहे हैं, जिससे चुनिंदा गुस्से और भेदभाव पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

BJP नेता पंकज चौधरी का 'राहत रूह' अगर सही है, तो 'लकी हेयर ड्रेसर' गलत कैसे है?

Muslim Shop Names Controversy: आजकल देश में पहचान की राजनीति पूरे शबाब पर है,कहीं दुकानदार के नाम पूछे जा रहे हैं, तो कहीं धर्म देखकर व्यापार करने का 'हक' तय किया जा रहा है. अगर मुस्लिम दुकानदार किसी हिंदू या हिंदी नाम से दुकान चलाते हैं, तो हिंदू संगठन के लोग टूट पड़ते हैं. आरोप लगाया जाता है कि वो अपनी पहचान छुपाकर व्यापार जिहाद कर रहे हैं. मुस्लिम व्यापारियों और दुकानदारों से सवाल पूछा जाता है. नाम मुस्लिम क्यों नहीं रखा? लेकिन यही तर्क जब ताकतवरों पर लागू करने की बात आती है, तो अचानक सब खामोश हो जाते हैं. उनके मानक बदल जाते हैं. 

बीजेपी शासित राज्यों में हिंदू संगठनों के सदस्य मुस्लिम व्यापारियों और दुकानदारों पर हमला कर रहे हैं, उन्हें दुकानें बंद करने के लिए मजबूर कर रहे हैं, पोस्टर फाड़ रहे हैं और धमकियां दे रहे हैं. ऐसी ही एक घटना देहरादून में GMS रोड पर हुई, जहां बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जबरदस्ती 'लकी हेयर ड्रेसर' नाम की दुकान बंद करवा दी.हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि अगर सैलून फिर से खुला तो वे दोबारा विरोध प्रदर्शन करेंगे. इसके बाद हिंदू संगठन के लोग मुस्लिम युवक को पुलिस के हवाले कर दिया. इसका एकमात्र कारण यह था कि दुकान का मालिक मुस्लिम था और 'लकी हेयर ड्रेसर'को हिन्दू नाम माना गया. 

कांवर यात्रा के दौरान सहारनपुर और मुज़फ्फर नगर में दर्ज़नों दुकानों और होटलों को बंद करा दिया गया और उसके संचालकों के साथ मारपीट तक की गई. उनका कसूर इतना था कि उन लोगों ने अपने व्यापारिक संस्थानों के नाम हिमालय होटल, वैष्णव शाकाहारी होटल, ड्रीम लाइट रेस्टुरेंट, रॉयल रेस्टुरेंट जैसे नाम रखे थे. मुस्लिम होकर हिंदी या हिन्दू नाम छदम सनातनियों को बर्दाश्त नहीं हुआ. उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया.   

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हैरानी की बात है कि यही संगठन तब आंखें बंद कर लेते हैं जब बड़े बिजनेसमैन, प्रभावशाली लोग, या सत्ताधारी पार्टी से जुड़े नेता भी मुस्लिम या उर्दू नामों का इस्तेमाल करके बिजनेस करते हैं. ऐसे मामलों में पहचान या धर्म की पवित्रता को लेकर कोई चिंता नहीं होती. तो असली मुद्दा नाम नहीं, ताकत है. असली सवाल धर्म नहीं, हैसियत है. इसी सिलसिले में हम आपको आज बता रहे हैं कि हिंदू बिजनेसमैन मुस्लिम नामों का इस्तेमाल करके अपना बिजनेस चला रहे हैं और इसमें बीफ प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियां भी शामिल हैं. ये हिंदू संगठन इनके खिलाफ हंगामा क्यों नहीं करते?

'राहत रूह' का मालिक कौन
दरअसल, उत्तर प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी एक बड़े कारोबारी हैं और उनकी पहचान सिर्फ एक बीजेपी नेता के रूप में नहीं है, बल्कि एक सफल इंडस्ट्रियलिस्ट के तौर पर भी  है. पंकज चौधरी की कंपनी हरवंशराम भगवानदास आयुर्वेदिक तेल, "राहत रूह" बनाती है, जो खासकर उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल इलाके में बहुत पॉपुलर है.  'राहत रूह' तेल का इस्तेमाल लोग जोड़ों के दर्द, सिरदर्द और बदन दर्द से राहत पाने के लिए करते हैं. यह तेल गांवों, कस्बों और शहरों में आसानी से मिल जाता है और लंबे समय से बाजार में इसकी अच्छी पकड़ बनी हुई है.इस आयुर्वेदिक बिजनेस ने पंकज चौधरी को आर्थिक रूप से सफल बनाया है. 'राहत रूह' एक उर्दू शब्द हैं. लेकिन किसी भी हिंदू संगठन को इससे ऐतराज नहीं है.

अल कबीर बूचड़खाना
देश का सबसे बड़ा बूचड़खाना तेलंगाना के मेडक जिले के रुद्रम गांव में है. लगभग 400 एकड़ में फैला यह बूचड़खाना सतीश सभरवाल का है. इसे अल कबीर एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड चलाती है.मुंबई के नरीमन पॉइंट में अपने हेडक्वार्टर से यह मिडिल ईस्ट के कई देशों में बीफ एक्सपोर्ट करता है. यह भारत का सबसे बड़ा बीफ एक्सपोर्टर भी है और मिडिल ईस्ट के कई शहरों में इसके ऑफिस हैं. 

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अरेबियन एक्सपोर्ट्स
अरेबियन एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड सुनील कपूर की कंपनी है. इसका हेडक्वार्टर मुंबई के रशियन मेंशन में है. यह कंपनी बीफ के अलावा मटन भी एक्सपोर्ट करती है. इसके बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में वीरनाथ नागनाथ कुडमुले, विकास मारुति शिंदे और अशोक नारंग शामिल हैं.

अल नूर एक्सपोर्ट्स
अल नूर एक्सपोर्ट्स सुनील सूद की कंपनी है. कंपनी का ऑफिस दिल्ली में है, लेकिन इसका बूचड़खाना और मीट प्रोसेसिंग प्लांट उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के शेरनगर गांव में है. इसके प्लांट मेरठ और मुंबई में भी हैं. इसके दूसरे पार्टनर अजय सूद हैं. कंपनी 1992 में शुरू हुई थी और 35 देशों को बीफ़ एक्सपोर्ट करती है.

ऐसी सैकड़ों कम्पनी है, जिनके मालिक हिन्दू जैन या किसी अन्य धर्म के हैं, लेकिन उन लोगों ने अपने प्रोडक्ट का नाम या ब्रांड नेम उर्दू में रखा है. 

मुस्लिम व्यापारी ने क्या कहा?
वहीं, दिल्ली के मशहूर सर्राफा कारोबारी आदिल अहमद कहते हैं, "उर्दू या अरबी नाम वाले प्रोडक्ट को मुस्लिम देशों में एक्सपोर्ट करने में आसानी होती है.इससे ग्राहकों के बीच एक भरोसा पैदा होता है. ये बिज़नेस आईडिया है, कोई भी इसे अपना सकता है. दुनिया का कोई भी कारोबार भरोसे और माल या सेवा की गुणवत्ता से चलता है. वैसे ही उर्दू किसी कौम या धर्म की भाषा नहीं है, कोई भी इसे बोल, लिखा सकता है. अपना या अपनी दुकान का नाम रख सकता है. इसपर कोई विवाद पैदा करना मूर्खता के अलावा कुछ नहीं होगा." लेकिन जब ऐसा कोई मुस्लिम करता है, तो सनातन के नाम पर हिंसक किस्म के लोग इसका विरोध करने लगते हैं."

उन्होंने आगे कहा कि यहां टाका कि वो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को भी नज़र अंदाज़ कर देते हैं, जिसमें कोर्ट ने साफ़- साफ़ कहा है कि किसी को मनचाहा कारोबार करने और नाम रखने से कोई रोक नहीं सकता है. किसी से जबरन अपने कारोबार या दुकान पर अपना नाम या पहचान उजागर करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है. ये नागरिकों के संविधानिक अधिकारों का उलंघन होगा.

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Tauseef Alam

तौसीफ आलम पिछले चार सालों से पत्रकारिता के पेशे में हैं. उन्होंने देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिल्लिया इस्लामिया से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है. Amar Ujala,Times Now...और पढ़ें

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