Karnataka Hate Speech and Hate Crimes Bill: कर्नाटक सरकार ने बढ़ती नफरत और धर्म आधारित अपराधों को रोकने के लिए हेट स्पीच और हेट क्राइम रोकथाम बिल विधानसभा में पेश किया. इस बिल को देख बीजेपी विधायक भड़क गए और हंगामा करने लगे. हालांकि, सरकार ने यह साफ कर दिया है कि इस बिल को लाने का मकसद किसी सियासी दल या नेता को निशाना बनाना मकसद नहीं है.
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Karnataka News Today: देश में हालिया दिनों अल्पसंख्यकों के खिलाफ खासतौर पर मुसलमानों के खिलाफ नफरत और धर्म के आधार पर हिंसा की घटनाएं बढ़ गई हैं. इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए कर्नाटक सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. इसी कड़ी में कांग्रेस की अगुवाई वाली सिद्धरमैया सरकार ने बुधवार (10 दिसंबर) को विधानसभा में कर्नाटक हेट स्पीच और हेट क्राइम्स (रोकथाम एवं नियंत्रण) बिल, 2025 पेश किया.
कर्नाटक विधानसभा में राज्य के कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल ने यह बिल सदन में प्रस्तुत किया. इस बिल के सदन में पेश करते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक आग बबूला हो गए और सदन शोरशराबा करते हुए विरोध करने लगे. बीजेपी विधायकों के विरोध पर सत्तारूढ़ पार्टी और आम लोगों ने हैरानी जताई है.
बिल से बीजेपी बौखलाई?
स्पीकर यू.टी. खाजदर ने बिल को वोटिंग के लिए रखा और कहा कि जो बिल के पक्ष में हैं वे 'हां' कहें और विरोध में 'ना'. इस दौरान बीजेपी सदस्य जोर-जोर से यह कहते रहे कि वे बिल को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेंगे और इसकी विस्तृत चर्चा की मांग की. हंगामा बढ़ने पर स्पीकर ने सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया.
हाल ही में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस बिल को मंजूरी दी गई थी. बिल का मकसद राज्य में हेट स्पीच और हेट क्राइम्स पर नियंत्रण और इनके प्रभाव को कम करना है. बीजेपी नेताओं ने पहले ही आरोप लगाया है कि यह विधेयक हिंदुत्व संगठनों से जुड़े नेताओं को निशाना बनाने के लिए लाया जा रहा है, खासकर तटीय कर्नाटक के साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में.
सिद्धरमैया सरकार यह बिल उस समय लाई है जब तटीय कर्नाटक के मंगलुरु जिले में सांप्रदायिक प्रतिशोध में हत्या की घटनाएं राष्ट्रीय स्तर पर खूब सुर्खियां बटोरीं. सरकार ने यहां की हिंसा पर रोक लगाने के लिए स्पेशल फोर्स भी बनाई और सोशल मीडिया की निगरानी के लिए अलग विंग नियुक्त किया.
हेट स्पीच और हेट क्राइम्स बिल में क्या है खास?
बिल के मुताबिक, हेट क्राइम करने पर 3 साल तक की जेल, 5,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं. यह अपराध नॉन-कॉग्निजेबल और नॉन-बेलेबल कैटेगरी में आएगा और इसकी सुनवाई प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में की जाएगी. ड्राफ्ट में यह भी साफ किया गया है कि धर्म, जाति, नस्ल, समुदाय, लिंग, लैंगिक रुझान, भाषा, मूल स्थान, निवास, जनजाति, विकलांगता आदि पहचान के आधार पर किसी शख्स या समूह के खिलाफ नफरत फैलाना, नुकसान पहुंचाना या नुकसान के लिए उकसाना हेट क्राइम माना जाएगा.
'बीजेपी नेताओं को निशाना बनाना मकसद नहीं'
वहीं, राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि यह कानून बीजेपी या उसके नेताओं को निशाना बनाने के लिए नहीं है. उन्होंने कहा, "हम हमेशा सत्ता में नहीं रहेंगे. सरकारें बदलती हैं, लेकिन कानून बना रहेगा. बिल में कहीं भी बीजेपी, कांग्रेस या जेडीएस का नाम नहीं है. इसे आज की जरूरत को देखते हुए लाया गया है और यह मौजूदा कानूनों को मजबूत करेगा." उन्होंने बताया कि मौजूदा कानूनी ढांचे में कुछ नए प्रावधान जोड़े जा रहे हैं.
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