)
Botad News Today: देश के अलग-अलग हिस्सों में मुसलमानों के खिलाफ नफरत और हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है. इस में काफी हदतक पुलिस या अन्य प्रशासनिक तंत्र का भी हाथ रहा है, इनके जरिये अल्पसंख्यकों पर की जा रही सख्ती और अमानवीय व्यवहार ने समाज में डर और असुरक्षा का माहौल बना दिया है. गुजरात के बोटाड में हाल ही में एक नाबालिग मुस्लिम लड़के के साथ हुई हिंसा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों के साथ अन्याय और अत्याचार हो रहा है. मानवाधिकार संगठनों ने इसे न सिर्फ शर्मनाक बताया है बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है.
दरअसल, यह दिल दहला देने वाली खौफनाक घटना गुजरात के बोटाड से सामने आई है. यहां हर नकोई इलाके के रहने वाले एक नाबालिग मुस्लिम लड़का आर्यन मखियाला को पुलिस ने चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने थाने में ले जाकार नाबालिग से लगातार नौ दिनों तक कथित रूप से बेरहमी से पीटा. बताया गया कि आर्यन अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए रोजाना मजदूरी करता था. बीते 19 अगस्त को बोटाड टाउन पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था. परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उसके साथ-साथ उसके दादा से भी थाने में मारपीट की गई.
अब इस मामले में पर मानवाधिकार संगठनों ने भी संज्ञान लिया है. अल्पसंख्यक संपर्क समिति (MCC) ने गुजरात पुलिस महानिदेशक (DGP) को चिट्ठी लिखकर कहा कि आर्यन की टांगों, कमर और किडनी में गंभीर चोटें आई हैं. वह डायलिसिस पर है और जिंदगी मौत से जूझ रहा है. फिलहाल वह अहमदाबाद के जायडस अस्पताल में बेहोशी की हालत में है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में उसके दादा, दादी और बहन ने पुलिस की बर्बरता का दर्द बयां किया है.
MCC ने की कार्रवाई की मांग
एमसीसी के संयोजक मुजाहिद नफीस ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है, साल 2023 में भी एक मुस्लिम नौजवान कालू पदर्शी को पुलिस हिरासत में पीट-पीटकर मार दिया गया था. उस मामले में तीन पुलिसकर्मियों को जेल भेजा गया था. नफीस ने पुलिस पर सुप्रीम कोर्ट के हिरासत संबंधी दिशा-निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगाया और कहा कि पुलिस ने नफरत फैलाने वाले इरादे से काम किया है.
इंकलाब में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, एमसीसी ने आरोपियों को तत्काल निलंबित करने, एफआईआर दर्ज करने, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने, सबूतों से छेड़छाड़ रोकने और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से आरियन का इलाज कराए जाने की मांग की है. संगठन ने यह भी कहा कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से ही लोगों का भरोसा बहाल हो सकता है.