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Brahmos Supersonic Missile: भारत के स्वदेशी ब्रह्मोस सुपरसॉनिक क्रूज़ मिसाइल ने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी सटीक और विनाशकारी क्षमता का जो प्रदर्शन किया, उसने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है. पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों और आतंकवादी ठिकानों पर इसकी प्रभावी स्ट्राइक्स के बाद कई देश अपनी एयर-डिफेंस क्षमता बढ़ाने के लिए ब्रह्मोस में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. इनमें दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश इंडोनेशिया भी शामिल है, जो अब एक संभावित खरीदार के रूप में उभर रहा है.
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस डील पर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है।.सूत्रों के मुताबिक रूस—जो भारत के साथ ब्रह्मोस का सह-विकासकर्ता है ने भी इस संभावित सौदे को समर्थन दिया है.
भारत, इंडोनेशिया की वायुसेना और नौसेना के लिए मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (MRO) सुविधाएं विकसित करने में भी मदद कर रहा है. इन सुविधाओं के निर्माण में भारत का सुखोई फाइटर जेट जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ लंबे अनुभव का उपयोग किया जा रहा है.
साजमासुद्दीन, जिन्हें इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियान्तो का करीबी माना जाता है, दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. खासकर इसलिए क्योंकि राष्ट्रपति सुबियान्तो का रणनीतिक फोकस भारतीय महासागर क्षेत्र पर है.
जनवरी में राष्ट्रपति सुबियान्तो भारत दौरे पर आए थे, जहां उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई थी. इस दौरान ब्रह्मोस खरीद का मुद्दा प्रमुख रहा था. इसी साल गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर राष्ट्रपति सुबियान्तो ने भारत की रक्षा क्षमता की प्रशंसा की थी और रक्षा क्षेत्र में और अधिक सहयोग की वकालत की थी.
राष्ट्रपति सुबियान्तो की भारत यात्रा के दौरान इंडोनेशिया की नौसेना के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भी ब्रह्मोस उत्पादन केंद्र का दौरा किया था. इस टीम का नेतृत्व चीफ ऑफ स्टाफ एडमिरल मुहम्मद अली ने की थी. उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल को करीब से देखा और उसकी क्षमता से काफी प्रभावित हुए थे. इसके बाद से इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने इस सिस्टम को खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखानी शुरू की.