कैसे ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान के साथ 'जय हिंद' बनी फौजी परंपरा की मजबूत आवाज?

Jai Hind Slogan History in Indian Army: ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान के शहादत दिवस पर देश उन्हें याद कर रहा है. नौशेरा के जंग में उनके साहस और अगुवाई ने इतिहास रचा. "जय हिंद" नारे को सैनिक एकता और देशभक्ति की निशानी बनाने में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है, जो आज भी प्रेरणा देता है.

कैसे ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान के साथ 'जय हिंद' बनी फौजी परंपरा की मजबूत आवाज?
Image Credit: ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान शहादत दिवसSource: ज़ी मीडिया ब्‍यूरो

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Raihan Shahid

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रैहान शाहिद उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले से ताल्लुक रखते हैं, जहां प्राचीन शाक्य साम्राज्य की राजधानी कपिलवस्तु में कभी महात्मा बुद्ध का बचपन और जवानी गुज़रा था. बुद्ध ने सत्य की तलाश में घर छोड़ा था, तो रैहान उच्च शिक्षा के लिए घर-परिवार का त्याग कर दिल्ली आ गए. उन्होंने देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया इस्लामिया से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और कानून (LLB) की पढ़ाई की है. वो पिछले 5 सालों से दिल्ली में पत्रकारिता कर रहे हैं. पिछले 2 सालों से वो Zee News के डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए काम कर रहे हैं. इससे पहले उन्होंने दिल्ली में दूरदर्शन और ABP चैनल में काम किया है. वो देश-विदेश की राष्ट्रीय महत्व की खबरें,शिक्षा, स्पोर्ट, राजनीति, कानून, सामाजिक न्याय, माइनॉरिटी और महिला अधिकार से जुड़े मुद्दों पर ख़बरें और रिपोर्ट बनाते हैं, और उनका संपादन करते हैं. किसी खबर, समस्या की सूचना देने या किसी खबर पर हौसला अफजाई या ऐतराज़ जताने के लिए रैहान शाहिद का पता-  raihan.shahid@india.com      

 

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