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Chhatarpur Shri Krishna Janmotsav Controversy: पूरी दुनिया में भारत को उसके गंगा जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए जाना जाता है. हालांकि, हालिया कुछ समय में जिन राज्यों में दक्षिणपंथी और कथित राष्ट्रवादी विचारधारा समर्थक पार्टियों का शासन है, वहां हिंदू-मुस्लिम समुदाय के बीच लगातार एक खाई पैदा करने की कोशिश की गई है. बहुसंख्यक समाज के लोगों को असामाजिक तत्व लगातार मुस्लिम समुदाय के खिलाफ उकसा रहे हैं, जिससे सांप्रदायिक तनाव बढ़ा है.
इसी तरह का एक हैरान करने वाला मामला मध्य प्रदेश के छतरपुर से सामने आया है, जहां सालों पुरानी हिंदू-मुस्लिम सद्भाव की परंपरा टूट गई है. भगवान कृष्ण के भक्तों को अब हिंदू और मुस्लिम में बांट दिया गया है, जिससे सैयद रसखान के समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों पर एक पल में महज उनके धर्म के आधार पर उनकी भक्ति पर सवालिया निशान लगा दिया गया है.
दरअसल, छतरपुर के बमीठा थाना परिसर में कई सालों से आयोजित की जा रही है श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की समिति भंग कर दी गई और इसकी वजह समिति के अध्यक्ष का ताल्लुक मुस्लिम समुदाय से होना बताया जा रहा है. इस समिति के अध्यक्ष 50 सालों से जमाल खान थे, जिनकी अगुवाई में पूरी श्रद्धा और भक्तिभाव से हर साल श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन किया जाता था.
हालांकि, अब कट्टरपंथियों के विरोध के जमाल खान की अगुवाई वाली श्रीकृष्ण जन्मोत्सव आयोजन समिति को भंग कर दिया गया. इसकी सूचना बमीठा थाना को दे दी गई. सालों पुरानी यह परंपरा टूटने से स्थानीय हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग काफी निराश हैं. वहीं, कई लोगों का कहना है कि अगर मुस्लिम समुयाद से इतनी नफरत है तो क्या वह भगवान श्रीकृ्ष्ण के भक्ति में लिखी गई, सैयद रसखान के दोहों और पदों को भी मिटा देंगे, जिनका मूल नाम सैयद इब्राहिम था.
मिली जानकारी के मुताबिक, छतरपुर के बमीठा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन पिछले कई सालों से पूर्व सरपंच जमाल खान की अध्यक्षता में होता रहा है. वह हाथ में कलावा बांधकर और माथे पर तिलक लगाकर भव्य आयोजन कराते थे, जो हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल थी. हालांकि, इस साल हिंदू संगठनों ने जमाल खान की अध्यक्षता पर आपत्ति जताई और उन्हें हटाने की मांग की.
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को हिंदूवादी संगठनों के जरिये काफी विरोध देखने को मिला, जिसके बाद समिति को भंग कर दिया गया. कार्यकारी अध्यक्ष रामकृपाल दीक्षित ने इसकी लिखित सूचना बमीठा थाने में दी है. समिति के सदस्यों का कहना है कि यह विवाद हाल ही में नाले को लेकर हुए एक मसले से जुड़ा है.
समिति के सदस्यों का आरोप है एक कथित हिंदूवादी नेता ने सरकारी नाले पर अवैध रूप से घर बना लिया था, जिससे बारिश का पानी के निकलने का रास्ता बंद हो गया और वह एक जगह इकट्ठा होने लगा. इसकी वजह से आसपास के कई घरों में पानी घुसने लगा. जमाल खान ने इस मामले में प्रशासन को अवगत कराया था. समिति का आरोप है कि इसी विवाद के बाद जन्माष्टमी आयोजन को सांप्रदायिक रंग दे दिया गया है.
समिति भंग होने के बाद स्थानीय विधायक अरविंद पटेरिया ने मामले का संज्ञान लिया और थाना प्रभारी को कार्यक्रम हर हाल में कराने के निर्देश दिए हैं. जमाल खान को हटाए जाने के बाद अब श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन पुलिस की निगरानी में होगा, जिसमें थाना प्रभारी और खजुराहो एसडीओपी मनमोहन बघेल संयोजक की भूमिका निभाएंगे. यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां दशकों से चली आ रही सांप्रदायिक सौहार्द की परंपरा पर एक कथित हिंदूवादी नेता की जाति दुश्मनी की भेंट चढ़ गया.