)
MLA Mufti Mohammed Ismail: छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के सदर ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तमाम वक्फ की संपत्तियों, मस्जिदों और दरगाहों पर तीरंगा लगाने को अनिवार्य बताया था. साथ ही उन्होंने कहा था कि अगर किसी मस्जिद पर तीरंगा नहीं लगाया जाता है, तो वह मस्जिद पाकिस्तानी मस्जिद है. इस फरमान के बाद राजनीतिक विवाद छिड़ गया है. ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लीमीन ने इस फैसले पर विरोध व्यक्त किया है. AIMIM के नेता और महाराष्ट्र के मालेगांव से विधायक मुफ़्ती मोहम्मद इस्माइल ने इसी सरकार की चापलूसी करार दिया है.
ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लीमीन के विधायक मुफ़्ती मोहम्मद इस्माइल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के सदर के उस बयान की कड़ी निंदा की. साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड सदर पर निशाना साधते हुए कहा कि वह मौजूदा हुकूमत के सामने अपनी वफादारी साबित करने के लिए चापलूसी कर रहे हैं. उन्होंने मस्जिदों पर तीरंगा लगाने को अनिवार्य करने वाले फैसले को मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल उठाने वाला फैसला बताया है.
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के सदर ने सिर्फ मस्जिदों पर तीरंगा लगाने को जरूरी क्यों किया है. विधायक मुफ़्ती मोहम्मद इस्माइल ने सवाल पूछते हुए कहा कि इस फैसले में मंदिर, चर्च और गुरुद्वारा को क्यों शामिल नहीं किया गया है? उन्होंने यह कहा कि छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के सदर ने यह क्यों नहीं कहा कि अगर मंदिर, चर्च और गुरुद्वारा पर तीरंगा नहीं लगाया गया तो वह पाकिस्तानी हैं? विधायक मुफ़्ती मोहम्मद इस्माइल ने बताया कि भारत की आजादी के लिए सबसे पहले मुसलमानों ने प्रतिरोध शुरू किया और इस आजादी के लिए सबसे ज्यादा मुसलमानों ने अपनी जान की कुर्बानी दी.
इसके साथ ही विधायक मुफ़्ती मोहम्मद इस्माइल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी के रिश्तों पर जोर देते हुए सवाल पूछा कि RSS के हेडक्वाटर पर लंबे अरसे तक तीरंगा नहीं फहराया गया था, तो क्या वह पाकिस्तानी है?