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Bihar Assembly Election 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव के माहौल के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है. सियासी दलों के नेता लगातार चुनावी तैयारियों में जुटे हुए हैं. इस बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने बड़ा कदम उठाते हुए अपने प्रदेश प्रधान महासचिव मोहम्मद मोतिउल्लाह खान को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है.
जमुई के रहने वाले मोहम्मद मोतिउल्लाह खान पर पार्टी विरोधी सरगर्मियों में शामिल होने और विरोधी दलों से संपर्क बनाए रखने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए न सिर्फ उन्हें प्रदेश प्रधान महासचिव पद से मुक्त किया है बल्कि उनकी प्राथमिक सदस्यता भी रद्द कर दी है.
अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सलीम साहिल ने इस संबंध में ऑफिशियल लेटर जारी किया है. जारी लेटर में साफ कहा गया है कि मोतिउल्लाह खान का आचरण पार्टी की नीतियों और अनुशासन के विपरीत पाया गया, जिसके चलते यह फैसला लिया गया. बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई इतवार दोपहर लगभग 1 बजे सार्वजनिक की गई, जिसके बाद लोजपा (रामविलास) के कार्यकर्ताओं में हड़कंप मच गया.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मोतिउल्लाह खान के विरोधी दलों से संपर्क के सबूत सामने आने के बाद शीर्ष नेतृत्व ने तत्काल यह कदम उठाया. इस कार्रवाई के बाद लोजपा (रामविलास) के अंदर हलचल तेज हो गई है. कुछ कार्यकर्ता इस फैसले को पार्टी की गरिमा और अनुशासन के लिए जरूरी बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अचानक लिया गया सख्त फैसला मान रहे हैं. मुस्लिम वोट बैंक पर नकारात्मक संदेश न जाए इसलिए पार्टी ने फैसला सलीम साहिल से जारी करवाया है.
गौरतलब है कि मोहम्मद मोतिउल्लाह खान लंबे समय से लोजपा (रामविलास) से जुड़े हुए थे. वे पहले जमुई जिला अध्यक्ष भी रह चुके हैं और दिवंगत नेता रामविलास पासवान के समय से पार्टी के सक्रिय सदस्य माने जाते रहे हैं. उनके निष्कासन के बाद जमुई जिले की लोजपा इकाई में असमंजस और असंतोष का माहौल देखने को मिल रहा है, वहीं कई कार्यकर्ता इस फैसले के बाद नेतृत्व से स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं.