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Asaduddin Owaisi Statement: हैदराबाद के सांसद औरऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बी.आर. गवई पर बीते दिनों वकील राकेश किशोर के जरिये किए गए हमले की कड़ी निंदा की. AIMIM प्रमुख ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं करना धार्मिक पक्षपात को जाहिर करता है.
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "अगर उसका नाम राकेश किशोर नहीं होता, उसकी जगह असद होता तो पुलिस क्या करती? बीजेपी वाले कहते पकड़ लो, ये पड़ोसी मुल्क से आया है, ये आईएसआई का एजेंट है. हर तरफ से मोर्चा खोल दिया जाता." असदुद्दीन ओवैसी ने एक सभा में दी, जिसकी वीडियो AIMIM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की है.
भारत के दूसरे दलित Chief Justice of India पर जूता फेंकने वाले के खिलाफ मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया?pic.twitter.com/WUd9pHhmwO
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) October 7, 2025
सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि पुलिसिया की कार्यवाही में दोहरा रवैया दिखाई पड़ता है. उन्होंने यूपी के बरेली का उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में 'I Love Muhammad' बैनर हटाने पर विरोध कर रहे मुस्लिमों पर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की थी. वहीं, राकेश किशोर के खिलाफ ढिलाई बरती जा रही है.
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पर हमला करने वाले राकेश किशोर ने भी बरेली का जिक्र किया था. राकेश किशोर ने 'सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान' का नारा भी लगाया था. हमलावर वकील राकेश किशोर ने सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई से इस बात से भी नाराज था कि कोर्ट ने यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ के बुलडोजर नीति का विरोध किया था. राकेश किशोर का कहना था कि वह सीजेआई की उस टिप्पणी से आहत हैं, जो एक मामले की सुनवाई के दौरान भगवान विष्णु की मूर्ति को लेकर की गई थी. हालांकि, सीजेआई ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उनका मकसद किसी का अपमान करना नहीं था.
सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए कहा, "मोदी जी, क्या आपकी सरकार और उसकी नीतियां जिम्मेदार नहीं हैं? आपकी सरकार ने ही इन लोगों के दिलों में जहर भरा है. यह राकेश किशोर अब भी कह रहा है कि उसे किसी बात की परवाह नहीं है." उन्होंने कहा, "दिल्ली पुलिस प्रधानमंत्री मोदी के अधीन आती है. ऐसे में क्या वह सिर्फ एक बयान देकर बच सकते हैं कि यह गलत था?"
सदुद्दीन ओवैसी ने जोर देकर कहा कि भले ही सीजेआई ने केस दर्ज न करने का फैसला लिया हो, लेकिन पीएम मोदी को कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए थी. ओवैसी ने याद दिलाया कि बी.आर. गवई देश के दूसरे दलित और पहले बौद्ध धर्म से आने वाले सीजेआई हैं. उन्होंने कहा, "मैं अपने दलित भाइयों और अंबेडकरवादी विचारधारा मानने वालों से कहना चाहता हूं कि यह घटना उनके लिए भी एक संदेश है."
ओवैसी ने यह भी तर्क दिया कि संसद में 2023 में बेरोजगारी के खिलाफ धुआं छोड़ने वाले युवाओं पर तो यूएपीए (UAPA) लगाया गया था, लेकिन राकेश किशोर पर क्यों नहीं लगाया गया. उन्होंने कहा, "पुलिस चाहती तो खुद भी शिकायत दर्ज कर सकती थी."
AIMIM प्रमुख असदुद्दी ओवैसी ने दावा किया कि मुसलमानों ने कभी भी अदालत के फैसलों के खिलाफ हिंसा का सहारा नहीं लिया. चाहे राम मंदिर का फैसला हो या तीन तलाक को अपराध घोषित करने का मामला. उन्होंने सवाल उठाया कि "मुसलमानों ने कहा कि हमें अदालत का फैसला मंज़ूर नहीं लेकिन क्या हमने किसी का नाम लेकर जूता उठाया?"