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Assam News: असम में अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर मुस्लिम समुदाय के धार्मिक स्थलों और मकानों को ध्वस्त किया जा रहा है. इन कार्रवाइयों के खिलाफ देश भर के मुस्लिम समुदाय में आक्रोश का माहौल है. इसी कड़ी में जमात-ए -इस्लामी, कांग्रेस से जुड़े लोग और कई समाजिक कार्यकर्ता असम का दौरा कर रहे हैं. इस पर सूबे के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कड़ा विरोध व्यक्त किया है. साथ ही इन लोगों पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने असम में अस्थिरता फैलाने का इल्जाम लगाया है.
बीते रविवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि कांग्रेस, जमात-ए इस्लामी से जुड़े लोग असम का दौरा कर रहे हैं और ये लोग पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ मिलकर असम को अस्थिर करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि प्रशांत भूषण और हर्ष मंदर असम के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि वजाहत हबीबुल्लाह, फैयाज शाहीन और जौहर सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं और जमात-ए-इस्लामी के सदस्यों से मिल रहे हैं.
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कहा कि असम की सरकार इन लोगों पर कड़ी नजर रख रही है. CM हिमंता ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त भी इसी तरह के दौरे हुए थे, लेकिन इस बार हम उन्हें कामयाब नहीं होने देंगे. हाल के हफ्तों में असम में रह रहे बांग्लाभाषी मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई बढ़ी है. उनके घरों को अवैध साबित कर ध्वस्त कर दिया जा रहा है.
पिछले दिनों जमीयत उलेमा-ए हिंद ने असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित कर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ विवादित बयान देने के इल्जाम में कार्रवाई करने की मांग की गई. साथ ही उन्हें मुख्यमंत्री पद से बर्खास्त करने की भी मांग की गई.
वहीं, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने एक बार फिर विवादित बयान देते हुए कहा कि जमित उलेमा ए हिंद के सदर मौलाना महमूद मदनी उनकी पकड़ में आ गए तो वह मौलाना मदनी को बांग्लादेश भेज देंगे.