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Nitish Kumar Urs Visit: बिहार की राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ में मौजूद खानकाह-ए-मुजुबिया में तीन दिवसीय उर्स का आगाज़ हुआ, जिसमें सूबे के मुखिया नीतीश कुमार ने शिरकत की. इस मौके पर मौलाना मिहनाजुद्दीन कादरी और अफताब आलम ने उन्हें चादर और टोपी पहनाकर स्वागत किया. सीएम नीतीश ने पीर मुजीबुल्लाह कादरी की मजार पर चादरपोशी कर राज्य में अमन-चैन, भाईचारे और तरक्की की दुआ मांगी. कार्यक्रम में बिहार सरकार के मंत्री और कई अधिकारी भी मौजूद रहे.
खास बात यह है कि इससे पहले मदरसे की 100वीं वर्षगांठ पर जब नीतीश कुमार को टोपी पहनाने की कोशिश की गई थी, तो उन्होंने टोपी पहनने से इनकार कर दिया था और अल्पसंख्यक मंत्री जमा खान को पहना दी थी. इस घटना के बाद नीतीश कुमार की आलोचना भी हुई. वहीं, कार्यक्रम में जमकर हंगामा हुआ. कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने नीतीश कुमार के खिलाफ नारेबाजी भी की थी. साथ ही वहां मौजूद लोगों ने सीएम नीतीश पर मुसलमानों को धोखा देने का आरोप लगाया. इससे पहले भी नीतीश कुमार ने गमछा पहनने से इनकार कर दिया था.
सियासी जानकार तरह-तरह के कयास लगाने लगे. किसी ने कहा कि नीतीश कुमार पीएम मोदी की राह पर चल पड़े हैं, तो किसी ने कहा कि टोपी न पहनकर नीतीश कुमार एक हिंदू समुदाय के वोट बटोरने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, विपक्ष ने भी इस मौके का फायदा उठाकर नीतीश कुमार को मुस्लिम विरोधी बताना शुरू कर दिया. हालांकि, इसी कार्यक्रम में नीतीश ने कहा कि उनकी सरकार ने मुसलमानों के लिए जितना काम किया है, उतना किसी ने नहीं किया.
वहीं, बिहार में 'वोट अधिकार यात्रा' के दौरान लोकसभा प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव मुंगेर में मौजूद पूर्व सज्जाद नसीन मरहूम हजरत वली रहमानी के मजार पर शिरकत की और चादर चढ़ाया. साथ ही हजरत मौलाना फैसल वली रहमानी से राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने मुलाकात भी की. इस मुलाकात के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई. सियासी जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार को मुस्लिम वोट छिटकने का डर है, इसलिए उन्होंने दरगाह पर जाकर चादर चढ़ाई और मुस्लिम टोपी पहनी.
गौरतलब है कि नीतीश कुमार हर साल रमज़ान के महीने में इफ्तार पार्टी का आयोजन करते हैं और टोपी पहनकर वो साफ संदेश देते हैं कि वो मुसलमानों के साथ हैं. सबसे खास बात ये है कि नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी में बीजेपी समेत कई पार्टियों के नेता भी शामिल होते हैं. नीतीश कुमार को धर्मनिरपेक्ष नेता कहा जाता है. अब इस घटना ने सबको चौंका दिया है. सियासी जानकार इसे राजनीति से जोड़ रहे हैं और कह रहे हैं कि एक बार फिर नीतीश कुमार टोपी पहनकर मुसलमानों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं.