Dargah Hazrath Syed Tajuddin Khaja Bagh Sawar Issue in Telangana HC: तेलंगाना के वेमुलावाड़ा में 800 साल पुरानी मानी जाने वाली दरगाह हजरत सैयद ताजुद्दीन ख्वाजा बाग सवार को चौंकाने वाली सामने आई है. तेलंगाना सरकार ने हाई कोर्ट में दावा किया कि मंदिर पुनर्विकास योजना के तहत दरगाह को पहले ही ट्रांसफर कर दिया गया. याचिकाकर्ता ने वक्फ कानून का हवाला देते हुए कार्रवाई को चुनौती दी है. इस मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी.
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Telangana Dargah Hazrath Syed Tajuddin Khaja Bagh Sawar News: तेलंगाना के वेमुलावाड़ा में एक ऐतिहासिक मजार सुर्खियों में हैं. इसकी वजह है हालिया दिनों मजार को ट्रांसफर करने को लेकर दिया गया आदेश, जिसके बाद अब तेलंगाना हाईकोर्ट में सरकार ने बड़ा खुलासा किया है. राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि 800 साल पुरानी मानी जाने वाली दरगाह हजरत सैयद ताजुद्दीन ख्वाजा बाग सवार को श्री राजा राजेश्वर स्वामी मंदिर परिसर से हटा दिया गया है.
कांग्रेस की अगुवाई वाली रेवंत रेड्डी सरकार के मुताबिक, मंदिर परिसर में चल रहे पुनर्विकास और मरम्मत कार्य को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया. सोमवार (2 मार्च) को हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जनरल ए. सुदर्शन रेड्डी ने जस्टिस बी. विजयसेन रेड्डी को बताया कि सिर्फ दरगाह हजरत सैयद ताजुद्दीन ख्वाजा बाग सवार ही नहीं, बल्कि मंदिर परिसर में मौजूद हिंदू धार्मिक ढांचों को भी पिछले महीने सुरक्षित जगह पर ट्रांसफर किया गया था. इनमें कोटिलिंगाला अंजनेया स्वामी की मूर्ति भी शामिल है. सरकार का कहना है कि यह सब मंदिर के पुनर्विकास योजना के तहत किया गया.
जस्टिस विजयसेन रेड्डी ने कहा कि हाई कोर्ट का दायित्व है कि वह धार्मिक स्थलों और श्रद्धालुओं के अधिकारों की रक्षा करे. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 26 फरवरी को जारी अंतरिम आदेश, जिसमें दरगाह को हटाने, गिराने या उसमें किसी तरह का बदलाव करने पर रोक लगाई गई थी, फिलहाल लागू नहीं होगा, क्योंकि सरकार ने अदालत को बताया है कि दरगाह पहले ही ट्रांसफर की जा चुकी है.
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'सियासत' ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील जीशान अदनान महमूद के हवाले से बताया कि राज्य सरकार की तरफ से पेश चारों वकीलों को भी यह जानकारी नहीं थी कि दरगाह पहले ही हटा दी गई है और न ही याचिकाकर्ता को इसकी जानकारी थी. उन्होंने कहा कि मामला संवेदनशील था, इसलिए अदालत ने सावधानी बरती. अगर यह किसी निजी संपत्ति का मामला होता, तो अदालत ज्यादा सख्त रुख अपनाती.
बता दें, तेलंगाना हाई कोर्ट मोहम्मद नजीमा की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें राजन्ना सिरसिल्ला जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन पर दरगाह के चारों ओर अवैध बाड़बंदी, बैरिकेड लगाने और रास्ता रोकने का आरोप लगाया गया है. याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में दलील दी कि यह दरगाह 800 साल से ज्यादा समय से वेमुलावाड़ा मंदिर में मौजूद है, जो भारत के सांप्रदायिक सौहार्द की निशानी रही है. उन्होंने कहा कि दरगाह के मुतवल्ली को इसे ट्रांसफर करने की इजाजत देने का कानूनी अधिकार नहीं है.
मोहम्मद नजीमा के वकील के मुताबिक, वक्फ अधिनियम की धारा 51 के तहत यह अधिकार केवल तेलंगाना स्टेट वक्फ बोर्ड के पास है. उन्होंने पूजा स्थल अधिनियम की धारा 3 का भी हवाला दिया, जो किसी भी धर्म या संप्रदाय के पूजा स्थल को दूसरे संप्रदाय या उसी धर्म के अन्य वर्ग के पूजा स्थल में बदलने पर रोक लगाती है.
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि फरवरी तक दरगाह मंदिर परिसर के भीतर ही मौजूद थी और इसे उसके मूल स्थान पर सुरक्षित रखने के लिए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई. हालांकि, हाई कोर्ट ने फिलहाल याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं दी. अदालत ने अगली सुनवाई 16 मार्च को तय की है और राज्य सरकार को तब तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. अधिवक्ता जीशान महमूद ने बताया कि पहले ही आदेश पारित हो चुका है और अब यह मामला रिट याचिका के आखिरी फैसले पर निर्भर करेगा.
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