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Film The Taj Story Controversy: फिल्म "कश्मीर फाइल्स", "उदयपुर फाइल्स" और बंगाल फाइल्स के बाद अब "द ताज स्टोरी" के नाम से एक नई फिल्म आ रही है. इस फिल्म पर जोरदार विवाद खड़ा हो गया है. मुस्लिम समाज के लोग इस फिल्म पर एतराज जाहिर कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि इस फिल्म की मदद से ताजमहल को एक शिव मंदिर दिखाने की कोशिश की गई है. यह फिल्म अगले महीने के 31 अक्टूबर को देश भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी.
दरअसल, हिंदूवादी संगठन की तरफ से ताजमहल में एक शिव मंदिर (तेजो महालय) होने का दावा किया जाता है. साथ ही कई बार ताजमहल के अंदर मौजूद मजार पर गंगा जल डालने की भी कोशिश की गई है. अब एक बार फिर से फिल्म 'द ताज स्टोरी' को लेकर यह विवाद खड़ा हो गया है. हालांकि इस फिल्म के एक्टर परेश रावल ने इस विवाद पर सोशल मीडिया पर स्पष्टिकरण दिया है.
उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट करके बताया कि यह फिल्म किसी धार्मिक आधार पर नहीं बनाई गई है. उन्होंने यह भी कहा कि यह फिल्म ताजमहल के अंदर शिव मंदिर होने का दावा भी नहीं करता है. उन्होंने बताया कि यह फिल्म ताजमहल के ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है. इस पोस्ट में परेश रावल ने कहा कि आप सभी इस फिल्म को देखर अपनी राय बनाएं.
गौरतलब है कि इससे पहले भी कई प्रोपेगेंडा फिल्में बन चुकी हैं. जिनमें मुस्लिम समाज और इस्लाम को एक विलेन के तौर पर दिखाया गया. इस फिल्म को लेकर भी मुस्लिम समाज में यही डर है. वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि इस देश में धार्मिक मुद्दों और विवादित मुद्दों पर फिल्म बनाकर पैसा कमाना आसान हो गया है, इसलिए सभी फिल्ममेकर इसी रणनीति को अपना रहे हैं.
अब देखने वाली बात यह है कि क्या मुस्लिम समाज के लोग और मुस्लिम संगठनों के लोग इस फिल्म पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट का रुख करेंगे. क्योंकि इससे पहले कई मुस्लिम विरोधी फिल्मों को रोकने के लिए मुस्लिम संगठ सुप्रीम कोर्ट तक गई है. हालांकि उन फिल्मों के कुछ सीन में बदलाव करके रिलीज करने करने के आदेश दे दिए जाते हैं. ऐसा कई विवादित फिल्मों के मामलों में देखा गया है.