FIR on ASP Anuj Chaudhary: संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा के दौरान पुलिस फायरिंग में घायल एक नाबालिग के वालिद ने कोर्ट में याचिका दायर की है. इस याचिका पर सुनवाई के बाद जिला अदालत ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, तत्काली इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 15 से 16 पुलिस वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिये हैं.
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Sambhal News: उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान 24 नवंबर 2024 को हिंसा भड़क गई थी. इस हिंसा में पांच लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हो गए थे. वहीं, संभल हिंसा के दौरान एक किशोर को गोली लगने के मामले में अब अदालत ने पुलिस के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. इस मामले में संभल जिला न्यायालय की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी, तत्कालीन कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर और 15 से 16 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है.
कोर्ट ने संभल कोतवाली पुलिस को निर्देश दिया है कि वह मामला दर्ज कर जांच शुरू करे. यह आदेश मंगलवार (13 जनवरी) को CJM विभांशु सुधीर की अदालत ने दिया. मामला संभल हिंसा के दौरान किशोर आलम के गोली लगने से घायल होने से जुड़ा है. याचिका आलम के वालिद यामीन ने कोर्ट में दायर की थी. यामीन ने मांग की थी कि उस समय ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों और जवानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए.
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, यामीन नखासा थाना क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय अंजुमन के रहने वाले हैं. यामीन ने याचिका में बताया कि उनका बेटा आलम 24 नवंबर 2024 को सुबह पापे (बिस्कुट) बेचने के लिए घर से निकला था. आलम ठेले पर पापे-बिस्कुट बेचने और दुकानों पर सप्लाई करने का काम करता था. उसी से उनके घर की रोजी रोटी चलती है.
एफआईआर में दी गई शिकायत के मुताबिक, 24 नवंबर 2024 की सुबह करीब 8 बजे आलम तीन पहियों का ठेला लेकर पापे बेचने के लिए निकला था. करीब 8:45 बजे जब वह शाही जामा मस्जिद क्षेत्र, मोहल्ला कोट, संभल के पास पहुंचा तो वहां पहले से ही काफी भीड़ जमा थी. शिकायत में कहा गया है कि उसी समय सीओ संभल अनुज चौधरी, संभल थाने के इंस्पेक्टर अनुज कुमार तोमर और उनके साथ मौजूद 15 से 20 पुलिसकर्मियों ने भीड़ पर अचानक अपने हाथों में लिए हथियारों से जान से मारने की नीयत से गोलियां चलानी शुरू कर दीं.
इसमें आगे कहा गया है कि आलम अपने ठेले को छोड़कर जान बचाने के लिए भागा, लेकिन पुलिस की दो गोलियां उसकी पीठ में लगीं और एक गोली उसके हाथ में लगी. गोली लगने के बाद आलम वहीं गिर पड़ा. याचिका में यह भी बताया गया है कि पीड़ित आलम के वालिद यामीन एक गरीब मजदूर हैं और मेहनत-मजदूरी करके परिवार चलाते हैं. उनका बेटा आलम ठेले पर पापे-बिस्कुट बेचकर परिवार की मदद करता था.
इस मामले में यामीन ने तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी और संभल कोतवाली के इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 10 से 12 पुलिसकर्मियों को प्रतिवादी बनाया था. शाही जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा के दौरान अनुज चौधरी संभल के सीओ थे और वर्तमान में वह फिरोजाबाद में एएसपी ग्रामीण के पद पर तैनात हैं.
मंगलवार को पीड़ित की शिकायत पर सुनवाई के बाद संभल जिला न्यायालय की CJM कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस मामले में पूर्व सीओ अनुज चौधरी, पूर्व इंस्पेक्टर अनुज तोमर और अन्य 15 से 16 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और मामले की विधिवत जांच की जाए. कोर्ट के इस आदेश के बाद आलम और उसके परिवार ने राहत की सांस ली है.
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