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Delhi Blast Update: अल-फलाह यूनिवर्सिटी से मिली नई सीसीटीवी फुटेज में खुलासा हुआ है कि रेड फोर्ट ब्लास्ट में इस्तेमाल की गई i20 कार 30 अक्टूबर तक यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर ही थी. अधिकारियों ने यह फुटेज दिल्ली विस्फोट की जांच के दौरान जब्त किया है.
मीडिया रिपोर्ट्स केम मुताबिक कार अल-फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस में थी. वायरल हो रही फुटेज 29 अक्टूबर की है. जिसमें दिखाई दे रहा है कि i20 कार यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट से एंट्री ले रही है. यह वही गाड़ी है, जिसे बाद में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. उमर नबी की बताई गई.
फुटेज में यह कार 30 अक्टूबर को दोपहर 2:41 बजे कैंपस से बाहर निकलते हुए दिखती है. अल-फलाह यूनिवर्सिटी जांच के दायरे में इसलिए आई है क्योंकि दिल्ली ब्लास्ट और 'व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल' मामले में जिन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है, वह यहीं पढ़ाते थे.
रेड फोर्ट ब्लास्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक जगहों पर चेकिंग और निगरानी बढ़ा दी है. इस घटना ने शहरी इलाकों में आतंकवाद और कट्टरपंथी नेटवर्क की सक्रियता को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है. अधिकारियों की कोशिश है कि यह पता लगाया जाए कि क्या अल-फलाह यूनिवर्सिटी का उन व्यक्तियों से कोई संबंध था, जिन पर हमले की योजना बनाने या उसे सहायता देने का शक है.
इस घटना के बाद शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा प्रोटोकॉल पर बहस तेज हो गई है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है.
दिल्ली पुलिस सूत्रों के अनुसार, ब्लास्ट साइट से 9 एमएम कैलिबर के तीन कारतूस मिला है. इनमें दो लाइव कारतूस हैं और एक खाली खोखा है. ये कारतूस नागरिकों के लिए प्रतिबंधित होते हैं और आमतौर पर सुरक्षा बलों या विशेष अनुमति प्राप्त व्यक्तियों के पास ही पाए जाते हैं. महत्वपूर्ण बात यह है कि मौके से कोई पिस्तौल या हथियार का हिस्सा नहीं मिला है.
ज्ञात हो कि 10 नवंबर को केंद्रीय एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में सक्रिय एक ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ का भंडाफोड़ किया था. इस दौरान 2,900 ज्किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी और आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें तीन डॉक्टर भी शामिल थे. इसके कुछ घंटे बाद ही राष्ट्रीय राजधानी में रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के पास धीमी गति से चल रही कार में हुए भीषण धमाका हुआ था. जिसमें 13 लोगों की मौत हुई थी.