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Delhi News Today: दिल्ली सरकार के हालिया फैसले से यमुना किनारे बसे लाखों लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है. बीते दिनों जोन-ओ (Zone-O) एरिया घोषित होने के बाद यहां रहने वाले लोगों को बेघर होने का डर सताने लगा था. जोन-ओ क्षेत्र की 91 कॉलोनियों को लेकर लंबे समय से चल रही चिंता अब काफी हद तक कम हो गई है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ किया है कि इन इलाकों में पहले से बने मकानों पर किसी तरह की तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं होगी.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के इस फैसले से करीब 15 लाख से ज्यादा लोगों ने राहत की सांस ली है. इनमें कई ऐसे इलाके भी शामिल हैं, जिन्हें दिल्ली के घनी आबादी वाले और मिश्रित, खासकर मुस्लिम बहुल आबादी वाले क्षेत्र माना जाता है. मंगलवार (9 जून) को दिल्ली सचिवालय में हुई उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी संबंधित विभागों के साथ बैठक कर हालात का जायजा लिया.
दिल्ली सरकार ने बैठक में जोन-ओ की स्थिति की साफ
इस बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि जो कार्रवाई है, वह सिर्फ नए और चल रहे अवैध निर्माणों पर लागू होगी, पुराने बने घरों पर नहीं. जोन-ओ यमुना नदी के किनारे फैला वह बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है, जहां अनधिकृत कॉलोनियों के साथ कई पुराने गांव भी बसे हुए हैं. यहां रहने वाली आबादी का बड़ा हिस्सा लंबे समय से यहीं रह रहा है, जिसमें अलग-अलग समुदायों के लोग शामिल हैं.
इससे पहले बैठक में जनप्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि हाल ही में लगाए गए चेतावनी बोर्डों की वजह से लोगों में भ्रम और डर का माहौल बन गया था. उनका कहना था कि पुराने घरों पर कोई खतरा नहीं है और यह स्पष्ट संदेश लोगों तक सही तरीके से पहुंचना चाहिए.
मुख्यमंत्री ने दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी डीडीए को निर्देश दिया कि न्यायालय के आदेशों के मुताबिक बोर्डों की भाषा को सरल और स्पष्ट बनाया जाए, ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी न रहे. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अनावश्यक डर से बचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है.
दिल्ली के कौन इलाके जोन-ओ में हैं शामिल?
इस क्षेत्र में वजीराबाद, जगतपुर, झरोदा, नूर कॉलोनी, दीपांशु कॉलोनी और मिलन विहार जैसे कई इलाके शामिल हैं. संगम विहार के कुछ हिस्से भी इस कैटेगरी में आते हैं. इसके अलावा न्यू अरुणा नगर, जिसे मजनू का टीला क्षेत्र भी कहा जाता है, का नाम भी इसमें शामिल है.
जोन-ओ बहस में जिन इलाकों का नाम अक्सर चर्चा में रहता है, उनमें जामिया नगर, ओखला, शाहीन बाग, मदनपुर खादर, जैतपुर, सोनिया विहार, खजूरी खास और सीलमपुर के यमुना किनारे बसे हिस्से शामिल हैं. इन क्षेत्रों में दिल्ली के दूसरे हिस्सों के मुकाबले मुस्लिम आबादी अपेक्षाकृत ज्यादा मानी जाती है. यही वजह है कि यह इलाका अक्सर चर्चाओं में रहता है. खासकर तब जब बाढ़ क्षेत्र और निर्माण प्रतिबंधों की बात आती है. इनमें से कई जगहों का शुमार मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में होता है.
सरकारी रिकॉर्ड और जनगणना के मुताबिक, दिल्ली में मुस्लिम आबादी लगभग 12 से 15 फीसदी के आसपास मानी जाती है. क्षेत्र के हिसाब से मुस्लिम जनसंख्या कम ज्यादा है. खासतौर से दिल्ली में ओखला, जामिया नगर, पुरानी दिल्ली, सीलमपुर, जाफराबाद, मुस्तफाबाद का शुमार मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में होता है. मुस्लिम आबादी का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों में रहता है. हालांकि, सारे क्षेत्र जोन-ओ में नहीं आते हैं.
अब बात करते हैं, दिल्ली के उन मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों की जिन्हें जोन-ओ कैटेगरी में रखा गया है. ओखला, जामिया नगर, शाहीन बाग, मदनपुर खादर, जैतपुर, मुस्तफाबाद, खजूरीखास, सीलमपुर, सोनिया विहार और वजीराबाद का कुछ हिस्सा शामिल है. यह इलाके में यमुना के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में आते हैं. जिनको जोन-ओ कैटेगरी में शामिल किया गया है. जोन-ओ का बोर्ड लगने के बाद इन इलाकों में दहशत फैल गई थी.
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की जोनल प्लानिंग के तहत ओखला क्षेत्र को Zone-O (अर्बन एक्सटेंशन जोन) में शामिल किया गया है. यह क्षेत्र दक्षिण-पूर्वी दिल्ली का एक घनी आबादी वाला शहरी विस्तार माना जाता है, जहां विकास मुख्य रूप से अनियोजित शहरीकरण और बाद में नियमितीकरण की प्रक्रिया के जरिए हुआ है.
शाहीन बाग, जामिया नगर समेत इन मुस्लिम क्षेत्रों को मिली बड़ी राहत
इस जोन में जामिया नगर, शाहीन बाग, बाटला हाउस, जाकिर नगर, अबुल फजल एन्क्लेव, जोगाबाई एक्सटेंशन और ओखला विहार जैसे प्रमुख रिहायशी इलाके शामिल हैं. भौगोलिक दृष्टि से ओखला-जामिया नगर का पूरा क्लस्टर लगभग 6 से 8 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है.
यह क्षेत्र एक सतत शहरी विस्तार के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें घनी रिहायशी कॉलोनियां, मुख्य सड़कें और मिश्रित आवासीय कॉलोनियों में शामिल हैं. ओखला- जामिया नगर की लगभग 10 लाख के करीब आबादी है, जिनमें से 55 से 70 फीसदी आबादी मुसलमानों की है.
वहीं, अब दिल्ली सरकार के फैसले से यहां के लोगों ने राहत की सांस ली है. हालांकि, इसके बावजूद बाटला हाउस के कुछ हिस्से बुलडोजर की जद में हैं. हालिया दिनों यहां पर डिमोलिशन की कार्रवाई भी हुई है. डीडीए के अधिकारियों के मुताबिक, बाटला हाउस और जाकिर नगर के पास बने कई इलाके यमुना बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में आते हैं, और इसको हटाने के लिए प्रशासन ने पहले ही अल्टीमेटम जारी कर दिया था.
क्या है Zone O क्षेत्र?
दिल्ली में यमुना नदी के किनारे बसे इलाके इन दिनों एक बड़े प्रशासनिक फैसले को लेकर चर्चा में हैं. इसे "जोन-ओ" कहा जाता है, जिसे दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के तहत पर्यावरण की लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है. यह क्षेत्र उत्तर दिल्ली के वजीराबाद से लेकर दक्षिण दिल्ली के ओखला तक फैला हुआ है.
मिली जानकारी के मुताबिक, यह करीब 9,700 हेक्टेयर का इलाका है, जो लगभग 165 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. यहां करीब 15 लाख घर या आबादी होने का अनुमान लगाया जाता है. इस पूरे क्षेत्र को इसलिए संवेदनशील माना गया क्योंकि भारी बारिश या बाढ़ की स्थिति में यह इलाका पानी को सोखने का काम करता है, जिससे दिल्ली के बाकी हिस्सों में बाढ़ का खतरा कम होता है और भूजल स्तर भी बेहतर होता है.
योजना बनाने वालों का मानना था कि यमुना के इस बाढ़ क्षेत्र को बचाना दिल्ली की पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसी वजह से जोन-ओ में किसी भी नए निर्माण या कॉलोनी विकसित करने पर रोक लगा दी गई थी. हालांकि, समय के साथ यमुना के किनारे कई बस्तियां और अनधिकृत कॉलोनियां बसती चली गईं.
आबादी बढ़ने के साथ वर्तमान में इस क्षेत्र में लगभग 90 से 100 अनधिकृत कॉलोनियां मौजूद बताई जाती हैं. इनमें से कई इलाकों में सीवर और निकासी की सही इंतजाम नहीं है, जिसकी वजह से गंदा पानी सीधे यमुना नदी में पहुंचता है और प्रदूषण बढ़ता है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन बस्तियों में रहने वाले ज्यादातर मकानों को फिलहाल तत्काल तोड़फोड़ की कार्रवाई से राहत दी गई है. यह राहत दिसंबर 2026 तक लागू कुछ अस्थायी संरक्षण कानूनों की वजह से दी गई है, जिन्हें समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है.
लेकिन इसी बीच 30 अप्रैल को डीडीए ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर कहा कि जोन-ओ क्षेत्र से सभी अतिक्रमण हटाए जाएंगे, हालांकि जो क्षेत्र प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत शामिल हैं, उन्हें इस कार्रवाई से छूट दी जाएगी. यह मामला तब और सुर्खियों में आ गया जब दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में इसको लेकर अहम आदेश दिया था. इसके साथ ही राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने भी मार्च में अधिकारियों को यमुना के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के स्पष्ट सीमांकन करने का निर्देश दिया था.
इसके बाद डीडीए ने ड्रोन सर्वे शुरू किया और कई जगहों पर बोर्ड लगाकर जोन-ओ की सीमाएं चिन्हित करने का काम शुरू किया. इन बोर्डों और सीमांकन प्रक्रिया की वजह से लाखों लोगों में यह भ्रम पैदा हो गया कि उनका घर इसी क्षेत्र में आता है. फिलहाल प्रशासन की कोशिश है कि पर्यावरण सुरक्षा और यमुना के बाढ़ क्षेत्र को बचाने के साथ-साथ वहां बसे लोगों की स्थिति को भी स्पष्ट किया जाए, ताकि किसी तरह की गलतफहमी न रहे.