Batla House Demolition Notice: हालिया दिनों दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी ने जामिया नगर बटला हाउस इलाके में कई मकानों को खाली कराने का नोटिस दिया था. इससे पहले आज डीडीए की टीम यहां पर मकानों की मैपिंग करने पहुंची, जिससे इलाके में अफरा तफरी मच गई.
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Delhi News Today: केंद्रीय राजधानी दिल्ली के जामिया नगर, बटला हाउस में बुधवार (4 जून) को दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) की टीम मकानों की मैपिंग करने के लिए पहुंची, जिसकी वजह से मौके पर अफरा तफरी मच गई और इलाके में भारी तनाव फैल गया. इन मकानों को 11 जून तक खाली करने का नोटिस दिया गया है.
हालिया दिनों ने जामिया नगर और बटला में इन मकानों को गिराने के लिए डीडीए ने नोटिस चस्पा किया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी ने मकान को खाली करने के लिए नोटिस जारी किया था. इसके लिए यहां के निवासियों को 11 जून तक मकान खाली करने को कहा गया है. इसी कड़ी में उससे पहले दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी ने मकान की मैपिंग कराने के लिए पहुंची है.
बता दें, दिल्ली के जामिया नगर स्थित बटला हाउस इलाके में जारी ध्वस्तीकरण नोटिस को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है. अदालत ने याचिकाकर्ताओं को फिलहाल राहत देने से मना करते हुए उचित प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करने का सुझाव दिया है. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की अवकाश पीठ ने ध्वस्तीकरण नोटिस पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई जुलाई में तय की है.
यह याचिका सुल्ताना शाहीन और 39 अन्य संपत्ति मालिकों ने वकील अदील अहमद के माध्यम से दायर की थी. याचिका में कहा गया कि 27 मई को उनके घरों पर 15 दिन के भीतर बेदखली और ध्वस्तीकरण का नोटिस चस्पा किया गया. यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट के 7 मई के आदेश के बाद जारी किया गया, जिसमें डीडीए और दिल्ली सरकार को अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे.
अमर उजाला में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उन्हें ना तो इस मामले में पक्षकार बनाया गया और ना ही अपनी बात रखने का कोई मौका दिया गया. उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 19 (1) (e) और 21 के तहत प्राप्त मूल अधिकारों का उल्लंघन बताया.
उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास वैध दस्तावेज, 2014 से पहले का कब्जा प्रमाण और संपत्ति अधिकार अधिनियम, 2019 के तहत पात्रता है. साथ ही कहा गया कि सिर्फ पीएम-उदय योजना के कवरेज से बाहर होने के नाम पर डिमोलिशन की कार्रवाई गलत है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दखल देने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को संबंधित प्राधिकरणों से संपर्क करने की सलाह दी है.
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