Delhi HC on Ajmer Dargah CCTV Issue: दिल्ली हाईकोर्ट ने अजमेर दरगाह में सुरक्षा के लिहाज से CCTV लगाने का आदेश दिया, लेकिन मुख्य अस्ताना (मजार) को कैमरे की जद से बाहर रखने का निर्देश दिया है. जिससे मजहबी जज्बात को ठेस न पहुंचे. दिल्ली कोर्ट ने सुरक्षा और आस्था, दोनों में संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया.
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Ajmer Sharif Dargah News Today: राजस्थान का अजमेर हमेशा ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह की वजह से गुलजार रहता है. यहां पर पूरी दुनिया से हर साल बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंचते हैं. अजमेर शरीफ दरगाह में सीसीटीवी कैमरा लगाए जाने का मुद्दा इस समय सुर्खियों में हैं. ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैहि के मुख्य आस्ताना शरीफ में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई है.
सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि दरगाह परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, लेकिन इस बात का खास ध्यान रखा जाए कि कैमरों में मुख्य मजार की तस्वीर कैद न हो. इस दौरान दरगाह कमेटी की तरफ से वकील यादवेन्द्र जादौन ने पक्ष रखा और अदालत को मामले की जानकारी दी.
दरगाह कमेटी के वकील यादवेन्द्र जादौन ने बताया कि यह मामला सैयद मेराज चिश्ती की याचिका पर कोर्ट में पहुंचा है, जिसमें मुख्य मुद्दा आस्ताना शरीफ में सीसीटीवी लगाने और दरगाह कमेटी की नियुक्ति को लेकर था. अदालत ने सीसीटीवी से जुड़े बाकी बिंदुओं और दरगाह कमेटी की नियुक्ति से संबंधित अन्य मांगों को खारिज कर दिया.
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के निर्देशों का पालन करते हुए और सुरक्षा व निगरानी को ध्यान में रखते हुए दरगाह में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना जरूरी है. अदालत ने कहा कि आस्ताना शरीफ परिसर में कैमरे लगाए जाएं, लेकिन मुख्य मजार कैमरे की जद में नहीं आना चाहिए. जिससे किसी की मजहबी जज्बात ठेस न पहुंचे.
कोर्ट ने दरगाह कमेटी के गठन को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं. इससे पहले अजमेर कोर्ट ने भी दरगाह परिसर में सीसीटीवी लगवाने के आदेश दिए थे. हालांकि, इस आदेश पर खादिम समुदाय की तरफ से आपत्ति जताई गई थी. इसी के बाद सैयद मेराज चिश्ती ने वरिष्ठ अधिवक्ता छाया सरकार के जरिये से यह याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की थी.
इस याचिका में भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और दरगाह ख्वाजा साहब के नाज़िम कार्यालय को भी पक्षकार बनाया गया था. भारत सरकार की ओर से अधिवक्ता अमित तिवारी ने अदालत में अपना पक्ष रखा. मामले पर दरगाह कमेटी अजमेर के वकील यादवेन्द्र जादौन ने मीडिया को जानकारी देते हुए अदालत की तरफ से जारी निर्देशों की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि कोर्ट ने सुरक्षा को तरजीह देते हुए यह फैसला लिया है, लेकिन मजहबी जज्जबात का ध्यान भी रखा गया है.