)
Delhi Dargah Demolition: सुप्रीम कोर्ट ने महरौली में मौजूद दरगाह हज़रत आशिक़उल्लाह और बाबा फ़रीद चल्लागाह को गिराए जाने के मामले में डीडीए को फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा है कि कोई 13वीं सदी के स्मारक को कैसे गिरा सकता है. इसके साथ ही अदालत ने कहा कि वहां कोई बदलाव या विस्तार नहीं होना चाहिए.
मामले का निपटारा करते हुए, अदालत ने मज़हबी मकाम को तोड़ने पर कड़ी नाराजगी ज़ाहिर की और कहा कि एएसआई को संबंधित ऐतिहासिक इमारतों की मरम्मत या नवीनीकरण के मामले की निगरानी करनी चाहिए. न्यायमूर्ति नागरत्न ने कहा कि 13वीं शताब्दी के इस धर्मस्थल में अदालत की इजाजत के बिनाी कोई तोड़फोड़ नहीं करनी चाहिए.
कोर्ट ने डीडीए से सवाल किया कि वह दरगाह को क्यों गिराना चाहते हैं. जिस पर डीडीए ने कहा कि वह दरगाह के खिलाफ नहीं है, यह एक पार्क है. दरगाह के पास अवैध निर्माण किया गया है. इस पर जज ने कहा कि जब हम हाईकोर्ट में थे, तब हमने सुप्रीम कोर्ट के इन आदेशों का पालन किया था. यह नियम लागू किया गया था कि आप सड़क के बीच में मंदिर नहीं बना सकते, फुटपाथ पर नहीं बना सकते, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है.
इस पर डीडीए ने कहा कि हम धार्मिक समिति की अनुमति के बिना कोई कार्रवाई नहीं करते. अदालत ने कहा कि यह इमारत धार्मिक समिति के सामने नहीं जा सकती क्योंकि यहां कोई अवैध कब्ज़ा नहीं है. हम आदेश देते रहते हैं कि मौजूदा इमारत में कोई बदलाव या विस्तार न हो, लेकिन जो है उसे संरक्षित रखा जाए. आप 13वीं सदी की इमारत को गिराने के बारे में कैसे सोच सकते हैं? हम यह भी नहीं चाहते कि इमारत के संरक्षण की आड़ में अवैध निर्माण हो.