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NCERT Changed History Syllabus: देशभर के स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताबों में बड़ा बदलाव किया गया है. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने मुगल शासन और सल्तनत काल को हटाने के बाद अब 8वीं कक्षा की नई सामाजिक विज्ञान की किताब से टीपू सुल्तान, हैदर अली, रजिया सुल्तान और नूरजहां जैसे ऐतिहासिक किरदारों को हटा दिया है.
केंद्र सरकार ने दावा किया कि ये बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय सिलेबस ढांचा (NCF-SE) 2023 के तहत किए गए हैं. इस पर विपक्षी नेताओं और इतिहासकारों की प्रतिक्रिया भी आने लगी है. इसको मुद्दे को विपक्ष ने राज्यसभा में पुरजोर तरीके से उठाया, जिस पर सरकार ने अपनी सफाई पेश की है. सियासी दलों ने आरोप लगाया कि इसे दक्षिणपंथी झुकाव रखने वाली सरकार राष्ट्रवाद की नई परिभाषा गढ़ रही है.
NCERT की नई किताब 'सामाजिक विज्ञान, पार्ट-I' में 18वीं सदी के मैसूर के मशहूर शासक टीपू सुल्तान और उनके पिता हैदर अली का कोई जिक्र नहीं है. इन दोनों मुस्लिम शासकों ने अंग्रेजों के औपनिवेशिक विस्तार का पुरजोर विरोध किया और इनके खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी. साथ ही, एंग्लो-मैसूर युद्धों को भी किताब से हटा दिया गया है, जो ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय संघर्ष का अहम हिस्सा माने जाते हैं.
इतना ही नहीं दिल्ली सल्तनत की पहली महिला शासक रजिया सुल्तान और मुगल दरबार में शक्तिशाली रही नूरजहां का भी जिक्र अब पाठ्यपुस्तक में नहीं मिलेगा. इन महिला का गुलाम वंश और मुगल काल में ऐतिहासिका रुप से काफी महत्वपूर्ण स्थान रहा था, जिसे मध्य कालीन भारत में भी महिलाओं के सशक्तिकरण के तौर पर देखा जा रहा था. इन बदलावों को लेकर शैक्षणिक जगत में विरोध देखने को मिल रहा है.
केंद्र सरकार से 6 अगस्त को राज्यसभा में टीएमसी सांसद ऋतब्रत बनर्जी ने इस मुद्दे पर सवाल पूछा था. इसके जवाब में शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि नई किताब में इन ऐतिहासिक शख्सियतों का जिक्र नहीं है. उन्होंने कहा कि सिलेबस को छात्रों की उम्र के मुताबिक तैयार किया गया है और इसका मकसद विषय की गहराई के बजाय व्यापक समझ पैदा करना है.
हालांकि, किताब से कुछ नाम हटाए गए हैं. वहीं, रानी दुर्गावती, अहिल्याबाई होल्कर और रानी अब्बक्का जैसी वीरांगनाओं को नई किताब में शामिल किया गया है. मंत्रालय का कहना है कि इसका मकसद किसी भी शासक की पूरी जीवनी पढ़ाना नहीं है, बल्कि छात्रों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संघर्ष से रुबरू कराना है.
NCERT का दावा है कि नया सिलेबस छात्रों को इतिहास सिर्फ रटकर नहीं बल्कि अनुभव और प्रमाणों के आधार पर समझने के लिए प्रेरित करता है. इसमें फील्ड वर्क और केस स्टडी जैसी उपायों को बढ़ावा दिया गया है.
शिक्षा मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि शिक्षा भारतीय संविधान की समवर्ती सूची में आती है, यानी राज्यों को अपने हिसाब से सिलेबस तय करने का अधिकार है. ऐसे में कोई भी राज्य चाहे तो टीपू सुल्तान और अन्य ऐतिहासिक किरदारों को अपने बोर्ड की किताबों में शामिल रख सकता है.
कुल मिलाकर NCERT की इस नई पहल को लेकर बहस तेज हो गई है. एक तरफ सरकार का तर्क है कि यह कदम छात्रों को उम्र के अनुसार शिक्षित करने और विषय की समग्र समझ विकसित करने के लिए है, तो दूसरी तरफ आलोचक इसे इतिहास के साथ छेड़छाड़ बता रहे हैं.
केंद्रीय राजधानी दिल्ली में स्थित एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के प्रोफेसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मुस्लिम नाम के ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण शख्सियतों के नाम हटाकर सरकार अपना एजेंडा तय करने में लगी है. इतिहास के महत्वपूर्ण पन्नों को निकाल कर वह दक्षिणपंथी विचारधारा को थोप रही है और तथ्यहीन बातों को NCERT की किताबों में डाल रही है.