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Delhi News: दिल्ली की एक अदालत ने आज दिल्ली दंगों के दौरान हुए राहुल सोलंकी हत्याकांड में जाकिर को बरी कर दिया है. जाकिर के अलावा इस मामले में 15 दूसरे आरोपी हैं जिन पर हत्या का आरोप है. इससे पहले जाकिर को इस मामले में प्रोक्लेम ओफेंडर घोषित किया गया था. लेकिन, हाईकोर्ट में उसे खारिज कर दिया गया और जाकिर को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई. प्रोक्लेम ओफेंडर उसे कहते हैं जो कोर्ट में पेश नहीं होता है और उसे एक तरह से भगोड़ा कहा जाता है.
आपको बता दें कि 24 फरवरी 2020 को दिल्ली के शिव विहार तराहे पर राहुल सोलंकी नाम के एक शख्स की गोली लगने से मौत हो गई थी, जिसमें 16 आरोपी आरोपी थे. जाकिर के वकील एडवोकेट बाबर चौहान ने मामले की पैरवी की और अदालत के सामने फैक्ट्स पेश किए.
इस मामले की सुनवाई दिल्ली के कडकडडूमा कोर्ट में हुई और अदालत ने जाकिर को हत्या के आरोप से बरी कर दिया. जाकिर के परिवार ने जहां उनके बरी होने पर खुशी और संतोष जताया, वहीं एडवोकेट बाबर चौहान ने फैसले का स्वागत किया और अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि जिन सबूतों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने लोगों को दिल्ली दंगों 2020 में आरोपी बनाया था, वे अदालत में औंधे मुंह गिर रहे हैं और निर्दोष लोगों को अदालत से न्याय मिल रहा है.
उन्होंने आगे कहा कि ऐसे सबूतों का झूठा साबित होना पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े करता है. उन्होंने कहा कि राहुल सोलंकी हत्याकांड में आज पांच साल बाद इन सबूतों का झूठा पाया जाना और अदालत का यह आदेश इस बात का सबूत है कि निर्दोष लोगों को आरोपी बनाया गया था.
बाबर चौहान ने कहा कि ऐसे लोगों को अदालतों से न्याय तो मिल जाता है, लेकिन उत्पीड़न, समय की बर्बादी, समाज में हत्या का गंभीर आरोप और कई सालों तक उसका कलंक, ज़मानत मिलना, क्लीन चिट मिलना, पैसा खर्च होना, इन सबकी भरपाई नहीं हो सकती.
ऐसे आरोपों और मामलों का सामना करने वाले ही इन्हें समझ सकते हैं. ज़ाकिर को न्याय तो मिल गया, लेकिन उसके किए की भरपाई कैसे होगी? ज़ाकिर जैसे और भी निर्दोष लोग हैं जो जेलों में, मुकदमों का सामना करते हुए, और मानसिक यातनाएं झेलते हुए अपने जीवन के अनमोल दिन बर्बाद करते हैं. उनके लिए क्या इनाम और मुआवज़ा होगा?