Delhi Riots Case: दिल्ली दंगा मामले में पिछले पांच सालों से जेल में बिना ट्रायल के कैद उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा समेत कई मुस्लिम स्टूडेंट्स ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की है. इस याचिका पर सुनवाई चल रही है. इसी कड़ी में आज दिल्ली पुलिस इस जमानत याचिका का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलीलें देगी. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.
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Delhi Riots Case: साल 2020 के दिल्ली दंगों के आरोप में उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा समेत कई मुस्लिम स्टूडेंट्स पिछले पांच साल से जेल में बंद हैं. उमर खालिद और शरजील इमाम पर दिल्ली दंगा भड़काने और मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है. सुप्रीम कोर्ट इन मुस्लिम छात्रों द्वारा दाखिल जमानत याचिका पर आज सुनवाई करेगी, जिसमें कोर्ट आज याचिका के खिलाफ दिल्ली पुलिस के दलीलें सुनेगी.
दरअसल, दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा द्वारा सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई जमानत याचिका के खिलाफ एक हलफनामा दायर किया है. हलफनामे में इन छात्रों को जमानत न देने का आग्रह करते हुए तर्क दिए गए हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ कर रही है. दिल्ली पुलिस आज (18 नवंबर) को इसी पीठ के सामने दलीलें सुनेगी.
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली दंगों के लिए मुख्य साजिशकर्ता बताया है. इस हलफनामे में कहा गया है कि दिल्ली दंगा उस वक्त भड़काया गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति भारत के दौरे पर आए थे. हलफनामे के मुताबिक ऐसा इसलिए किया गया ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित किया जा सके और उस समय चल रहे CAA कानून के मुद्दे को भारत में मुस्लिम समुदाय के नरसंहार के रूप में दिखाया जा सके.
बता दें कि इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने इन छात्रों की जमानत याचिका को खारिज कर दी थी, जिसके बाद इन छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की है. साल 2020 में उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा समेत कई मुस्लिम स्टूडेंट्स मोदी सरकार के CAA कानून का विरोध कर रहे थे. इस विरोध को मुस्लिम समाज का भारी समर्थन मिला. इसी बीच पश्चिमी दिल्ली में दंगे हुए, जिसके बाद इन छात्रों को साजिशकर्ता बता कर जेल भेज दिया गया. उमर खालिद और शरजील इमाम पर UAPA की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है.