)
नई दिल्ली: दिल्ली दंगे के आरोपियों उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर और दूसरे लोगों को सोमवार (3 नववंबर) को सुप्रीम कोर्ट से फिर निराशा मिली. सभी आरोपी लगभग पांच से जेल में बंद हैं और उनकी जमानत याचिका लगातार टलती जा रही है. आज फिर उनकी जमानत याचिका टल गई.
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट 6 नवंबर दोपहर 2 बजे उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. ये सभी मुल्जिम गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत पिछले पांच सालों से जेल में बंद हैं.
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की बेंच 3 नवंबर को हुई मुल्जिम मीरान हैदर, मोहम्मद सलीम खान और शिफा उर रहमान और दिल्ली पुलिस की दलीलें को आगे सुनना जारी रखेगी. पिछली समाअत में उमर खालिद की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि प्रॉसिक्यूशन जान-बूझकर ट्रायल में देरी कर रहा है, और अब इसका इल्जाम मुल्जिम पर डालने की कोशिश कर रहा है.
सिब्बल ने कहा था कि दंगों से जुड़ी 751 एफआईआर में से सिर्फ एक में खालिद का नाम था. जब दंगे हुए, तब वह दिल्ली में भी नहीं था. उसके पास से अभी तक कोई भी गुनाह साबित करने वाला सबूत बरामद नहीं हुआ है. सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी थी कि खालिद पर लगाए गए कोई भी इलज़ाम यूएपीए के तहत 'आतंकवादी गतिविधि' की परिभाषा में नहीं आते हैं. उन्होंने सह-आरोपी आसिफ इकबाल तन्हा, देवंगाना कलिता और नताशा नरवाल को मिली जमानत के आदेशों का भी हवाला दिया था.
वहीँ, शरजील इमाम के वकील सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि प्रॉसिक्यूशन को जांच पूरी करने में तीन साल से ज्यादा का वक़्त लग गया और वे सितंबर 2024 तक सिर्फ सप्लीमेंट्री चार्जशीट फाइल करते रहे हैं. मुकदमा आगे नहीं बढ़ सका, क्योंकि जांच अभी चल रही है. पांच में से तीन साल जांच में ही निकल गए. शरजील इमाम दंगों से करीब एक महीना पहले से यानी 25 जनवरी 2020 से जेल में हैं. अगर कोई जनवरी से जेल में हूं तो फरवरी के दंगों में उसकी क्या भूमिका हो सकती है?
इससे पहले, दिल्ली हाईकोर्ट ने शरजील इमाम, उमर खालिद और अन्य आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी.
मुस्लिम माइनॉरिटी की ऐसी ही खबरों के लिए विजिट करें https://zeenews.india.com/hindi/zeesalaam