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Delhi Riots 2020: केंद्रीय राजधानी दिल्ली में साल 2020 में दंगे भड़क गए थे. इस दंगे में 53 लोग मारे गए थे. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने कई लोगों को दंगे की साजिश रचने के आरोप में हिरासत में लिया था. इन दंगों में शरजील इमाम, उमर खालिद, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा समेत कई कथित आरोपी पांच साल से जेल में बंद हैं. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (31 अक्टूबर) को शरजील इमाम, उमर खालिद और अन्य के जमानत मामले सुनवाई की.
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की. सरकार और अन्य आरोपियों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस अरविंद कुमार ने सुनवाई को सोमवार (3 अक्टूबर) तक के लिए टाल दिया. इस दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए कोर्ट से सुनवाई मंगलवार तक टालने की अपील की.
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू की इस मांग को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा, "नहीं-नहीं, हमें फ्रेश सुनवाई करनी है. आप अपने साथियों से कहें कि वे मौजूद रहें, हम देखेंगे क्या कर सकते हैं." इसके साथ ही जस्टिस कुमार ने आदेश दिया कि इस मामले को सोमवार की लिस्ट में पहले नंबर पर रखा जाए.
सुनवाई के दौरान अलग-अलग आरोपियों की ओर से कई दिग्गज वकीलों ने कोर्ट के सामने अपनी दलीलें पेश की. पिंजरा तोड़ गैंग की आरोपी गुलफिशा फातिमा की ओर से सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें पेश कीं. शरजील इमाम की पैरवी सिद्धार्थ दवे ने की, जबकि उमर खालिद की तरफ से सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने दलीलें दीं.
अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में कहा, "मैं अप्रैल 2020 से जेल में हूं यानी 5 साल 5 महीने से. चार्जशीट 16 सितंबर 2020 को दाखिल की गई थी. अब हर साल एक पूरक चार्जशीट दाखिल करना पुलिस के लिए एक सालाना रिवाज बन गया है." उन्होंने आगे कहा, "मुझ पर आरोप है कि मैं पिंजरा तोड़ महिला समूह का हिस्सा हूं और गुप्त मीटिंग्स में शामिल रही हूं. देवांगना और नताशा को जमानत मिल चुकी है, लेकिन मैं अब भी जेल में हूं. मुझ पर आरोप है कि मैंने प्रदर्शन स्थल बनाया था, लेकिन जिन जगहों पर मैं थी, वहां किसी तरह की हिंसा नहीं हुई. न वहां मिर्च पाउडर, न तेजाब जैसे कोई सबूत नहीं है."
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस मामले को सोमवार की प्राथमिकता सूची में डालने का आदेश दिया. जस्टिस अरविंद कुमार ने साफ कहा कि यह सुनवाई सोमवार को ही होगी. जब एएसजी राजू ने मंगलवार तक का समय मांगा, तो जस्टिस कुमार ने सख्ती से कहा, "नहीं, नहीं सुनवाई सोमवार को ही होगी. अपने साथियों से कहें कि वे मौजूद रहें."
दिल्ली पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि उमर खालिद और उनके साथियों ने सुनियोजित तरीके से साजिश रची, उसका प्रचार किया और उसे अंजाम तक पहुंचाया. पुलिस के मुताबिक, इस साजिश का मकसद सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़कर देश की एकता और संप्रभुता पर हमला करना था. आरोप है कि उन्होंने भीड़ को न सिर्फ हिंसा के लिए उकसाया बल्कि सशस्त्र विद्रोह के लिए भी प्रेरित किया.
न्यूज18 में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने अपने हलफनामे में कहा कि आरोपियों की चैट और अन्य रिकॉर्ड से यह जाहिर होता है कि यह साजिश उस समय रची गई थी, जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत दौरे पर आ रहे थे. इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित करना और CAA विरोध को मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नरसंहार के रूप में पेश कर वैश्विक मुद्दा बनाना था.