SC on Delhi Roits Accused Bail Plea: दिल्ली दंगा केस में उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई आज सुप्रीम कोर्ट में पूरी हो चुकी है. अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया है और दोनों पक्षों को अपनी दलीलों से जुड़े दस्तावेज 18 दिसंबर तक जमा करने के निर्देश दिए हैं.
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Delhi Riots 2020 Case Hearing: दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी उमर खालिद, शरजील इमाम सहित अन्य की जमानत याचिकाओं पर आत बुधवार (10 दिसंबर) को अदालत में सुनवाई पूरी हो गई है. कोर्ट ने फैसला अभी सुरक्षित रखा है. अदालत ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे अपनी दलीलों से जुड़े सभी दस्तावेज 18 दिसंबर तक जमा कर दें. इसके बाद कोर्ट आदेश सुनाएगी.
बता दें, बुधवार (10 दिसंबर) को देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था में 2020 दिल्ली दंगों के केस में शरजील इमाम, उमर खालिद, मीरान हैदर, गुल्फिशा फातिमा, शिफा-उर-रहमान समेत कुल सात आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई. इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. अदालत ने दोनों पक्षों को अपनी दलीलों से जुड़े सभी दस्तावेज 18 दिसंबर तक जमा करने के निर्देश दिए हैं.
इससे पहले मंगलवार (9 दिसंबर) को शरजील इमाम की ओर से जमानत की अपील की गई. उनकी दलील थी कि उनका हिंसा से कोई ताल्लुक नहीं रहा है और न ही वह किसी भी तरह दंगों में शामिल थे. उनके मुताबिक, वह करीब छह साल से विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में बंद हैं. शरजील की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सीनियर वकील सिद्धार्थ दवे ने दलील रखी. उन्होंने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन. वी अंजारिया की बेंच से कहा कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ सिर्फ एक बात पेश कर पाया है, सिर्फ उनके भाषण.
शरजील इमाम के वकील सिद्धार्थ दवे के मुताबिक, भाषण में कुछ शब्द भले ही आपत्तिजनक लगें, लेकिन उसे हिंसा भड़काने वाला या षड्यंत्रकारी नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा कि शरजील ने भाषण में अहिंसा की ही अपील की थी. दवे ने कहा, "उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़े तो मार खा लीजिए, लेकिन हमला मत कीजिए. इस बात को कैसे साजिश माना जा सकता है?"
'दंगे से जुड़ी किसी एफआईआर में नहीं शरजील का नाम'
शरजील को 28 जनवरी 2020 को गिरफ्तार किया गया था, जबकि दिल्ली में दंगे 22 से 24 फरवरी 2020 के बीच हुए. वकील ने यह भी बताया कि दंगों से जुड़ी करीब 750 एफआईआर दर्ज की गई थीं, लेकिन उनमें कहीं भी शरजील का नाम नहीं था. उन्होंने कहा कि जिस साजिश की बात कही जा रही है, उसके लिए विचारों का मेल जरूरी होता है, जबकि दंगे होने से लगभग एक महीने पहले ही शरजील को हिरासत में लिया जा चुका था.
एनडीटीवी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, सिद्धार्थ दवे के अलावा सीनियर वकील सलमान खुर्शीद, सिद्धार्थ लूथरा और अन्य अधिवक्ताओं ने भी अन्य आरोपियों की ओर से अपने-अपने पक्ष रखे. सुप्रीम कोर्ट अब दस्तावेज जमा होने के बाद इस मामले में फैसला सुनाएगी. फिलहाल सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हुई हैं.
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