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Bhagalpur Riots 1989: देश ने आजादी के बाद कई बड़े दंगों का दर्द झेला है. इन दंगों में सैकड़ों महिलाएं विधवा हो गईं, हजारों बच्चे अनाथ हो गए. देश की इन्हीं भयावह त्रासदियों में से एक है बिहार का भागलपुर दंगा (1989-90). इस दंगे में कईयों ने अपनों को खो दिया है. पीड़ित आज भी उस दिन को याद कर सिहर उठते हैं. सरकार ने पीड़ितों को मुआवजा और पेंशन देने का ऐलान किया था.
इंकलाब की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भागलपुर दंगा पीड़ितों में से एक हैं बीबी अकीला, जिन्होंने अपने पति को खो दिया था. दंगों पीड़ितों के लिए जारी की गई मुआवजा राशि और योजनाओं से 35 साल बाद भी बीबी अकीला महरूम हैं. इस मामले में पटना हाई कोर्ट ने अकीला के जरिये दायर याचिका पर लंबित मुआवजा देने का आदेश दिया था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कोर्ट के आदेश को ताक पर रखकर मुआवजा नहीं जारी कर रहे हैं.
अकीला के मुआवजे वाली फाइल आज भी सरकारी दफ्तरों में धूल फांक रही है. उन्हें न तो मुआवजा मिला है और न ही दूसरे दंगा पीड़ितों की तरह मासिक पेंशन दी जा रही है. इस उम्र में मुआवजे की आस में बीबी अकीला बड़े-बड़े अधिकारियों के ऑफिस के कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं.
बीबी अकीला के पति का मोहम्मद छेदी है. वह जिले के भटोरिया गांव की रहने वाली हैं. अकीला ने बताया कि दंगाइयों ने उनके पति मोहम्मद छेदी और ससुर मोहम्मद वकील की हत्या कर दी थी. अकीला ने अपनी अर्जी में कहा कि दंगों के दौरान उनके ससुर की दूसरी पत्नी बीबी कबरी (जो कि छेदी की सौतेली मां थीं) ने उनके पति को अविवाहित बताकर 1 लाख 1 हजार रुपये मुआवजे के रूप में ले लिए.
बीबी अकीला ने दावा किया कि उनकी सौतेली सास बीबी कबरी और उनकी बेटी ने मिलकर और भी सरकारी सहायता की रकम ले ली. बीबी कबरी की 2020 में मौत हो गई थी. बीबी अकीला की याचिका पर पटना हाई कोर्ट ने 20 दिसंबर 2022 को आदेश दिया था कि उन्हें लंबित मुआवजा और पेंशन दी जाए. इसके बाद सरकार के गृह विभाग की तरफ से भी दो महीने के अंदर कार्रवाई के निर्देश दिये गये थे, लेकिन अब करीब डेढ़ साल बीत जाने के बावजूद भी अकीला को न मुआवजा मिला है और न ही पेंशन मिली है.
बीबी अकीला ने सरकार को बताया कि उनके पति के नाम पर मिलने वाली 13.5 लाख की अतिरिक्त सहायता राशि उन्हें 2012 में बैंक के माध्यम से मिली थी, लेकिन उनके हिस्से की 1 लाख रुपये की राशि अभी तक नहीं मिली है. अकीला के मुताबिक, 1 लाख रुपये गलत तरीके से उसके पति की सौतेली मां को दे दिए गए. इसके अलावा उन्हें दूसरे दंगा पीड़ितों की तरह मासिक पेंशन से भी वंचित रखा गया है.