Doon Hospital Mazar: देहरादून के दून अस्पताल में बने मजार को ढहा दिया गया है. इसके बाद जो हुआ उसे लोग देखकर हैरान रह गए. दरअसल ये मजार लोगों को धोखा देने के लिए बनाया गया था. जानें पूरा मामला
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Doon Hospital Mazar: राजधानी देहरादून के दून अस्पताल परिसर में बनी एक अवैध मजार को प्रशासन ने देर रात तोड़ दिया गया है. यह कार्रवाई मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर ऋषिकेश निवासी पंकज गुप्ता के जरिए की गई शिकायत के बाद की गई. आरोप है कि मजार सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के तहत बनाई गई थी.
मजार किसी वली या फकीर की कब्र पर बनाया जाता है. जिस कब्र में उसे दफनाया जाता है उसके आसपास के अहाते का घेराव करके मज़ार को तामीर किया जाता है. खास बात ये है कि जब मज़ार को ढहाया गया और वहां से कोई अवशेष भी नहीं मिले. यानी ये फर्जी तौर पर बनाया गया मजार था, जिसके जरिए अकीदतमंदों को धोखा दिया जा रहा था.
शिकायत की जांच जिलाधिकारी देहरादून के डायरेक्शन पर राजस्व विभाग, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग (PWD), दून अस्पताल प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों ने मिलकर की थी. जांच में पाया गया कि मजार के तामीर के लिए किसी भी तरह की लीगल इजाज़त नहीं ली गई थी और यह अस्पताल की जमीन पर अवैध तौर पर बना था.
#WATCH | Dehradun, Uttarakhand | Late night, a joint team of Municipal Corporation, Public Works Department, Doon Hospital Administration and District Administration together completed the demolition of the illegal Mazar built on government land. pic.twitter.com/FTfERDKQFY
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) April 26, 2025
प्रशासन ने मजार से जुड़े खादिम को नोटिस भी जारी किया था और अस्पताल प्रशासन से इस बाबत विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी. जांच के बाद देर रात नगर निगम, PWD, जिला प्रशासन और पुलिस बल की मौजूदगी में मजार को बुलडोजर से गिरा दिया गया. कार्रवाई के दौरान अस्पताल मार्ग को सील कर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे.
मजार को लेकर लंबे समय से स्थानीय लोगों के बीच चर्चाएं थीं. कुछ लोग इसे किसी फकीर की मजार बताते थे तो कुछ इसे अंधविश्वास से जोड़ते थे. बताया जाता है कि वहां बैठे खादिम अस्पताल के मरीजों को इबादत के लिए प्रेरित करते थे, जिससे अस्पताल प्रशासन को भी असुविधा होती थी.
सूत्रों के अनुसार, इससे पहले भी अस्पताल मैनेजमेंट ने इस मजार के चलते ट्रीटमेंट में आ रही रुकावटों को लेकर शासन को पत्र लिखकर इसे हटाने की मांग की थी. देर रात की कार्रवाई में मजार को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया.