Durgakund Imambara: वाराणसी के दुर्गाकुंड इमामबाड़े पर नगर निगम ने दावा किया है. हालांकि, मुस्लिम पक्ष इसे वक्फ की जमीन बता रहा है. वहीं हिंदू पक्ष का कहना है कि यहां पहले एक कुआ हुआ करता था. जिस पर मुंडन संस्कार होता था.
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Durgakund Imambara: वाराणसी के दुर्गाकुंड में मौजूद इमामबाड़े का मामला और गंभीर होता जा रहा है. इस पर नगर निगम और हिंदू समुदाय ने दावा किया है. एक तरफ मुस्लिम पक्ष इमामबाड़ा होने का दावा कर रहा है और इसे वक्फ की जमीन बता रहा है. तो वहीं हिंदू पक्ष का कहना है कि यहां पहले कुआ हुआ करता था, जहां मुंडन संस्कार होता था.
हालांकि अब हिंदू पक्ष का दावा मजबूत होता दिख रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इमामबाड़े में पर्दे के पीछे से कुआ दिखाई दिया है. यहां के मुतवल्ली ने जैसे ही पर्दा हटाया तो कुआ सामने दिखाई देने लगा, बताया जा रहा है कि यह कुआं प्राचीन समय से जलस्रोत का बड़ा साधन हुआ करता था, जिसे बाद में दीवार से ढक दिया गया.
गौरतलब है कि दुर्गाकुंड पुलिस चौकी के पीछे 240 वर्गमीटर सरकारी जमीन पर बने इस इमामबाड़े के दस्तावेज़ों की जांच तेज हो गई है. सिटी मजिस्ट्रेट की टीम ने जनाना कुआं और मर्दाना इमामबाड़े के अंदर जाकर गहन निरीक्षण किया और नपाई भी की. जांच के आधार पर तहसील के पुराने रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है. माना जा रहा है कि जल्द ही प्रशासन इस मामले में एक्शन ले सकता है।
इमामबाड़े के मुतवल्ली मिर्जा नवाब प्यारेलाल का कहना है कि इमामबाड़ा वक्फ बोर्ड की संपत्ति है. यह सैकड़ों साल पुराना है और जमीन से जुड़े सभी कागजात उनके पास मौजूद हैं. हिंदू पक्ष से जुड़े लोगों का आरोप है कि मर्दाना इमामबाड़े को तामीर 1990 के बाद किया गया, जबकि मूल इमामबाड़ा वहां से कुछ दूरी पर स्थित है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पहले एक कुआ हुआ करता था. उस कुएं के पास श्रद्धालु आते थे और मुंडन संस्कार होता था. लेकिन तत्कालीन सरकारों की सरपरस्ती में वहां कब्जा करके निर्माण कर दिया गया. नगर निगम का आरोप है कि जिस जमीन पर इमामबाड़ा बना है, वह नगर निगम की है और इस पर अवैध कब्जा कर निर्माण किया गया है.