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Israeli Massacre in Gaza: अमेरिका और इजराइल के नापाक मंसूबों से पूरी दुनिया में हलचल मची हुई है. अमेरिका की आर्थिक, सैन्य मदद और रणनीतियों के बूते इजराइली फौज लगातार मीडिल ईस्ट में नरसंहार कर रही है. यहूदी फौज के हमलों में ग़ज़ा, यमन, लेबनान, ईरान और सीरिया में लाखों लोगों की मौत हो चुकी है. बेगुनाहों की हत्या के विरोध में पूरी दुनिया में विरोध प्रदर्शन हो रहा है.
स्पेन और इटली में ग़ज़ा पर इज़राइल की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन देखने को मिले. शनिवार (4 अक्टूबर) को स्पेन के बार्सिलोना में लाखों की भीड़ उमड़ी, वहीं रोम में भी दूसरे दिन भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए. स्पेन की राजधानी मैड्रिड और पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में भी इसी तरह के प्रदर्शन देखने को मिले. भारी विरोध प्रदर्शन को देखकर इजराइली नरसंहार का समर्थन करने वाले यूरोप के कई देशों की सरकारें सहमी हुई नजर आईं.
इन प्रदर्शनों के पीछे की वजह ग़ज़ा में इजराइली नरसंहार और फिलिस्तीन के बेगुनाहों के लिए मानवीय सहायता जहाज (फ्लोटिला) को रोका जाना है, जो बार्सिलोना से ग़ज़ा की नाकाबंदी तोड़ने के लिए निकला था. इस हफ्ते इजराइल ने फ्लोटिला से 450 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया, जिनमें 40 से ज्यादा स्पेनिश नागरिक और बार्सिलोना के पूर्व मेयर भी शामिल हैं. मानवीय सहायता लेकर पहुंचे फ्लोटिला के कार्यकर्ताओं के साथ यहूदी फौज ने बदसलूकी की.
इटली में शुक्रवार को ही 20 लाख से ज्यादा लोगों ने ग़ज़ा के समर्थन में एक दिन की आम हड़ताल की थी. शनिवार (4 अक्टूब) को राजधानी रोम में हुआ प्रदर्शन कोलोसियम के रास्ते से होकर गुजरा. आयोजकों में तीन फिलिस्तीनी संगठनों, स्थानीय यूनियनों और छात्रों शामिल थे. इस प्रदर्शन के आयोजकों ने दावा किया कि इसमें 10 लाख लोग शामिल हुए. इन विरोध प्रदर्शनों की वीडयो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है.
पियाजा सैन जियोवानी में प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि फ्रांसेस्का अल्बानेसे का नाम लेकर नारे लगाए. आयोजकों ने कहा था कि सिर्फ फिलिस्तीनी झंडे लाए जाएं, लेकिन कुछ बैनरों में हिज्बुल्लाह और हमास का समर्थन किया गया. एक पोस्टर पर लिखा था, "7 अक्टूबर, फिलिस्तीनी प्रतिरोध का दिन (यानी जिस दिन हमास ने हमला किया), जबकि एक बड़े झंडे पर लिखा था 'आईडीएफ की मौत.' लोगों ने कहा कि आईडीएफ के खिलाफ नारे यहूदी फौज का फिलिस्तीनियों के हत्या के विरोध में लगाए गए.
इजराइली नरसंहार के खिलाफ आम लोगों के साथ नेता, छात्र, मानवाधिकार कार्यकर्ता और आमोखास सब शामिल हैं. इटली की विपक्षी पार्टी पिउ यूरोपा के सांसद रिकार्डो माजी भी मार्च में शामिल हुए. उन्होंने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार पर हमला करते हुए कहा कि वह स्पेन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों की तरह फिलिस्तीन को मान्यता देने से बच रही है.
सांसद रिकार्डो माजी ने कहा,"मेलोनी को यह मानना होगा कि यह नरसंहार के खिलाफ बगैर इरादे के और खुद ब खुद शुरू हुआ प्रदर्शन हैं और उनकी सरकार की निष्क्रियता व मिलीभगत के खिलाफ उठ रही आवाज है. उन्हें अब शांति के लिए कूटनीतिक कदम उठाने होंगे."
बार्सिलोना की नगर परिषद के मुताबिक, शनिवार के प्रदर्शन में लगभग 70,000 लोग शामिल हुए. शहर की मुख्य सड़क पासेग दे ग्रासिया पर लोग परिवारों सहित बड़ी संख्या में जुटे. हाथों में फिलिस्तीनी झंडे और बैनर थे, जिन पर लिखा था, "नेतन्याहू सरकार के जरिये ग़ज़ा में किए जा रहा नरसंहार हमें दुख देता है, जनसंहार रोको और फ्लोटिला को हाथ मत लगाओ.”
इस प्रदर्शन में दूर-दराज से लोग शामिल होने के लिए पहुंचे थे. 63 वर्षीय मारिया जीसस पार्रा भी करीब एक घंटे से ज्यादा का सफर तय कर इस नरसंहार के खिलाफ प्रदर्शन करने आई थीं. उन्होंने कहा, “यूरोप ने 1940 के दशक में जो महसूस किया, उसके बाद यह कैसे संभव है कि हम आज लाइव हो रहे नरसंहार को देखते रहें? अब कोई यह नहीं कह सकता कि उन्हें पता नहीं था.”
स्पेन में हाल के हफ्तों में फिलिस्तीनियों के लिए समर्थन बढ़ा है. प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने ग़ज़ा में तबाही को “जनसंहार” बताया और सभी इजराइली टीमों को अंतरराष्ट्रीय खेलों से प्रतिबंधित करने की मांग की. स्पेन की वुएल्टा साइकिल रेस भी इजराइल के स्वामित्व वाली टीम की मौजूदगी की वजह से बार- बार रोकनी पड़ी.
शनिवार को मैड्रिड और लिस्बन में भी बड़े प्रदर्शनों की योजना है. वहीं, ग्रीस के एथेंस और उत्तर मैसेडोनिया की राजधानी स्कोप्जे में छोटे रैलियां हुईं. ग्रीक पुलिस को उम्मीद है कि इतवार को एथेंस में और बड़ा प्रदर्शन होगा, जो एक प्रो-इजराइल रैली के साथ-साथ होगा. दोनों रैलियों के बीच करीब 3 किलोमीटर की दूरी रखी जाएगी और पुलिस सुरक्षा बढ़ाएगी.
ग़ज़ा में 7 अक्टूबर 2023 से इजराइली हमलों में अब 67,000 से ज्यादा बेगुनाह फिलिस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें से ज्यादातर बच्चे और औरतें हैं. इसी तरह इजराइली फौज के लगातार नाकाबंदी की वजह से ग़ज़ा में सैकड़ों लोगों ने भूख और कुपोषण से दम तोड़ दिया. इतना ही नहीं नेतन्याहू सरकार के फौज के हमलों में अब तक 1,70,000 हजार से ज्यादा लोग घायल हैं.
इतना ही नहीं, इजराइली हमलों में पूरे फिलिस्तीन में लगभग 80 फीसदी बुनियादी ढांचे, जिनमें इमारतें भी शामिल हैं, नेस्तानाबूद हो चुके हैं. यह आंकड़े ग़ज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय (हमास प्रशासन के अधीन) के जरिये जारी किए हैं, जिसे संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां और स्वतंत्र विशेषज्ञ सबसे ज्यादा विश्वसनीय मानते हैं. इजराइल समर्थक मीडिया संस्थान ग़ज़ा नरसंहार की वजह 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले को जिम्मेदार ठहराने में लगी हैं, जबकि दुनियाभर के जानकारों का कहना है कि ग़ज़ा में इजराइली नरसंहार की इबारत 7 अक्टूबर 2023 से कहीं पहले लिखनी शुरू की जा चुकी थी.