Facebook Ad Controversy: इजराइल के जरिये फिलिस्तीन की जमीनों पर की गए अवैध कब्जे वाले इलाकों का फेसबुक पर बढ़ावा देने के आरोप लगे हैं. इजराइली कंपनियों ने इन जमीनों को बेचने के लिए फेसबुक पेड विज्ञापन दिए, जिसको सोशल मीडिया की पैरेंटल कंपनी मेटा पूरी तरह से रोकने में नाकाम ही है.
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Facebook Promote illegal Israeli Ads: एक मीडिया रिपोर्ट में सोशल मीडिया प्लेफॉर्म फेसबुक को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फेसबुक ने अपने प्लेटफॉर्म पर अवैध इजराइली बस्तियों और वेस्ट बैंक में दक्षिणपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को जगह दी है, जिनकी संख्या 100 से ज्यादा है. फेसबुक को इन विज्ञापनों से खासा मुनाफा हुआ है. दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों में शुमार फेसबुक के कथित अंतरराष्ट्रीय उल्लंघन को लेकर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं.
फेसबुक पर कई विज्ञापनों को अभी भी प्रसारित किया जा रहा है. इसमें एरियल जैसे पॉश बस्तियों में बेशकीमती संपत्तियों की लिस्ट शामिल है. यह जगह ग्रीन लाइन से 20 किमी पूरब की ओर वेस्ट बैंक के अंदर अवैध कब्जे वाले इलाके में है. भड़काऊ विज्ञापनों में फिलिस्तीनी घरों, स्कूल और स्पोर्ट्स ग्राउंड को ध्वस्त करने की अपील भी शामिल है. इसी तरह फेसबुक पर पोस्ट दूसरे विज्ञापनों में गाजा में ऑपरेशन में हिस्सा लेने वाली फौजी यूनिट्स के लिए चंदा देने की अपील की गई थी.
फेसबुक पेज पर इसी तरह का एक और विज्ञापन चर्चा का विषय बना हुआ है, वो है रामात अडेरेट (Ramat Aderet). इस विज्ञापन के जरिये तीन सौ मिलियन डॉलर के प्रोजेक्ट को प्रमोट किया जा रहा है, जिसको "परफेक्ट क्वालिटी ऑफ लाइफ के लिए पेंटहाउस" के टैगलाइन के साथ प्रमोट किया जा रहा है. जो कई आधुनिक सुविधाओं से लैस है और काफी लग्जरी माना जा रहा है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर पोस्ट 52 ऐसे विज्ञापनों की निशादेही की गई है, जिसे इजराइली रियल एस्टेट कंपनियों ने इजराइल, इंग्लैंड और अमेरिकी ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार किया है. फेसबुक की पैरेंट कंपनी, मेटा इससे पहले भी फिलिस्तीन के मजलूमों की आवाज दबाने और नफरत फैलाने वालों भाषणों को रोकने में नाकाम रही है, जिससे फेसबुक की खूब किरकिरी हुई थी.
अलजजीरा में छपी खबर के मुताबिक, फेसबुक की तरफ से कहा गया है कि आधुनिक तकनीक की मदद से उनके पेज पर प्रसारित सभी विज्ञापनों की समीक्षा की जाती है. फेसबुक ने इस बात को स्वीकार किया है कि उनके प्लेटफॉर्म से 'साजामिक मुद्दों, इलेक्शन और सियासत' पर आधारित नीतियों का उल्लंघन करने पर कई विज्ञापनों को हटा दिया गया है. हालांकि, उन्होंने इस पर कोई सफाई नहीं दी, जिसमें कहा गया कि क्या अवैध कब्जे वाली जमीनों पर बनाई गई बस्तियों का प्रचार करना और उनको बढ़ावा देना नियमों का उल्लंघन नहीं है.
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