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Fatehpur Maqbara: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के अबुनगर इलाके में मौजूद नवाब अब्दुल समद के मकबरे में सिद्दतपसंद हिंदूवादी भीड़ द्वारा तोड़फोड़ मामले में एक प्रशासनिक कमेटी ने इस घटना की जांच कर एक विस्तृत रिपोर्ट योगी सरकार को सौंप दी है.
इस रिपोर्ट में नवाब अब्दुल समद के मकबरे में तोड़फोड़ के लिए आला पुलिस अफसरों की लापरवाही को जिम्मेदार बताया गया है. दरअसल, पिछले 11 अगस्त को नवाब अब्दुल समद के मकबरे में विश्व हिंदू परिषद, बजरंगदल और भाजपा के सिद्दतपसंद कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ किया था. इसके बाद योगी सरकार ने प्रयाग राज के कमिश्नर और आईजी से इस घटना पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी.
इस घटना पर पूरे 6 दिनों तक जांच करने के बाद कमेटी ने 80 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट योगी सरकार को सौंप दी है. इस रिपोर्ट में मकबरे की जमीन का रजिस्ट्रेशन सुन्नी वक्फ बोर्ड में दर्ज बताया गया है और इस जमीन को सामुदायिक जमीन करार दिया बताया गया है. साथ ही रिपोर्ट में बताया गया कि मकबरे में इस तरह की घटना होने की सुचना पहले से मिलने के बावजूद फतेहपुर जिले के पुलिस कप्तान मौके पर मौजूद नहीं थे.
रिपोर्ट में बताया गया है कि हिंदूवादी भीड़ ने भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद बैरिकेडिंग को फांद कर मकबरे में तोड़ फोड़ की और पुलिस ने इस घटना को रोकने के लिए कुछ नहीं किया. रिपोर्ट में बताया गया है कि घटना होने के बाद फतेहपुर जिले के पुलिस कप्तान अनूप कुमार सिंह मौके पर पहुंचे, जब तक बहुत देर हो चुकी थी.
गौरतलब है कि इस मकबरे को लेकर हिंदूवादी संगठन का दावा है कि पहले इस मकबरे की जमीन पर ठाकुरजी का मंदिर था, जिसे मुस्लिम समाज ने तोड़ दिया और वहां मकबरा बना दिया. हिंदूवादी भीड़ ने इस घटना को अंजाम देने से कुछ दिन पहले से ही माहौल बना रहे थे. इन हिंदूवादी संगठन के नेताओं की सांप्रदायिक भाषण देते हुए वीडियो वायरल हो रहे थे, लेकिन पुलिस ने मौके रहते कोई कदम नहीं उठाया.
वहीं, फतेहपुर मकबरे में तोड़फोड़ करते हुए कई वीडियो वायरल हुए, जिसमें उपद्रवी साफ देखे जा सकते हैं. इसके बावजूद उपद्रवियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. मुस्लिम समाज प्रशासन के सुस्त रवैए पर सवाल खड़े कर रहे हैं.