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FIR-NCR Difference: भारत का शुमार दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों में होता है. इसके संविधान और कानून को सबसे लचीला माना जाता है. यहां का कानून कई मायनों में खास है. भारतीय कानून ने सभी को एक समान बताया और सभी संप्रदाय के लोगों गरिमा और मर्यादा से जिंदगी गुजारने का हक देता है. सबसे आसान और न्याय के दरवाजे तक आसानी से पहुंच के बावजूद लोगों को इंसाफ पाने की बुनियादी चीजें नहीं पता हैं. जिनमें सबसे पहला है एफआईआर और एनसीआर.
इस लेख में एफआईआर (FIR) और एनसीआर (NCR) पर चर्चा करेंगे. साथ ही यह भी जानेंगे कि FIR-NCR कब और क्यों करेंगे? देश के किसी भी हिस्से में जब भी कोई अपराध होता है जैसे मारपीट, लड़ाई-झगड़ा, गाली-गलौज, हत्या, संपत्ति विवाद या किसी सामान का चोरी या गुम हो जाना, इस तरह के मामलों में ज्यादातर लोगों को बस इतनी सी जानकारी होती है कि इसकी जानकारी पुलिस को दे देनी चाहिए.
पुलिस किसी भी अपराध की जानकारी मिलने पर फौरन कार्रवाई के लिए बाध्य होती है. ऐसी स्थिति में आमतौर पर पुलिस अपराध की जानकारी मिलने पर दो काम करती है या तो एफआईआर (First Information Report) दर्ज करती है या एनसीआर (Non-Cognizable Report). लेकिन ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि पुलिस सीधे एनसीआर दर्ज कर देती है. एफआईआर का मतलब है प्रथम सूचना प्रतिवेदन, यानी किसी अपराध की पहली जानकारी. वहीं, एनसीआर का मतलब है असंज्ञेय मामले की रिपोर्ट, यानी मामूली या गैर-संवेदनशील मामले की सूचना.
सीआरपीसी के तहत अपराध दो तरह के होते हैं. पहला संज्ञेय अपराध, जो गंभीर होते हैं. पुलिस इन अपराधों में बिना वारंट के आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है और एफआईआर दर्ज करती है.
दूसरा मामला होता है असंज्ञेय अपराध, जो मामूली होते हैं. इन मामलों में पुलिस को कोर्ट से इजाजत लेनी पड़ता है और गिरफ्तारी नहीं की जा सकती. ऐसी घटनाओं में दी गई सूचना को एनसीआर में दर्ज किया जाता है.
अपराध के तुरंत बाद एफआईआर दर्ज करवाना सबसे सही तरीका है. इससे पुलिस एक्टिव हो जाती है और सबूत इकट्ठा होते हैं, अपराधी पकड़ा जा सकता है और पीड़ित को सुरक्षा मिलती है. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा 173 के तहत पुलिस को सूचना दर्ज करने और एफआईआर रजिस्टर में नोट करना फर्ज है. इस दौरान सूचना देने वाले का हस्ताक्षर लिया जाता है और उसको फ्री में कॉपी भी दी जाती है. एफआईआर भारतीय साक्ष्य विधि के तहत एक कानूनी दस्तावेज माना जाता है.
इसी तरह एफआईआर की तरह एनसीआर के भी कई फायदे हैं. किसी मामले में अगर कोई याची एफआईआर दर्ज नहीं कराना चाहता है तो पुलिस में एनसीआर जरुर दर्ज करा दे. उदाहरण के तौर पर अगर सिम कार्ड, क्रेडिट, डेबिट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या अन्य दस्तावेज खो जाएं और उसका कोई अवैध इस्तेमाल कर रहा है तो एनसीआर की कॉपी के आधार पर बचाव किया जा सकता है. कई बार पुलिस गुम या चोरी हुए सामान की रिकवरी कर लेती है और एनसीआर की कॉपी होने पर सामान शिकायतकर्ता को लौटा भी दिया जाता है.
कई बार ऐसा होता है कि पुलिस मामूली धारा लगाकर एनसीआर दर्ज कर देती है, जबकि मामला गंभीर हो. ऐसे में नागरिक प्रथम श्रेणी के कोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं और कोर्ट से आदेश ले सकते हैं कि पुलिस एफआईआर दर्ज करे. पुलिस अगर किसी शख्स की एफआईआर दर्ज नहीं करती है तो यह कानूनी जुर्म है. ऐसे में आप प्रथम श्रेणी कोर्ट में BNS-2023 की धारा 175 (3) के तहत याचिका दायर कर सकते हैं. जिसमें कोर्ट के माध्यम से यह आदेश दिया जाता है कि इस मामले में पुलिस एफआईआर दर्ज करे.