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Shaniwar Wada Controversy: पुणे के ऐतिहासिक शनिवारवाड़ा परिसर में तीन महिलाओं के नमाज अदा करने की वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है. इस मामले में पुलिस ने तीन अज्ञात महिलाओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है. मुस्लिम महिलाओं के नमाज पढ़ने के बाद बीजेपी की राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी ने हिंदूवादी संगठनों के साथ गोमूत्र से शुद्धिकरण किया था.
पुणे सिटी पुलिस के मुताबिक, यह एफआईआर Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains (AMASR) Rules, 1959 के तहत दर्ज की गई है. इन नियमों के तहत संरक्षित स्मारकों में कुछ गतिविधियों पर प्रतिबंध है. बताया जा रहा है कि यह घटना शनिवार दोपहर करीब 1:45 बजे हुई. इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के एक अधिकारी ने पुणे पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई.
वीडियो वायरल होने के बाद इतवार (19 अक्टूबर) को बीजेपी सांसद मेधा कुलकर्णी और पुणे के कई हिंदूवादी संगठनों ने शनिवारवाड़ा के बाहर जमकर हंगामा किया. इतना प्रदर्शनकारियों ने उस जगह पर 'शुद्धिकरण' का अनुष्ठान भी किया, जहां नमाज़ पढ़ी गई थी. इस घटना के बाद पुलिस ने शनिवारवाड़ा के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है. एफआईआर के संबंध में एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा, "हमने AMASR नियमों के तहत वह धारा लगाई है, जिसमें संरक्षित स्मारकों के भीतर निषिद्ध गतिविधियों के लिए सजा का प्रावधान है."
मुस्लिम महिलाओं पर कार्रवाई के बाद पुलिस पर सवाल उठने लगे हैं. विपक्षी दलों ने पुलिस बीजेपी के दबाव में कार्रवाई के आरोप लगाए हैं. यह भी सवाल उठता है कि अगर मुस्लिम महिलाएं के शनिवारवाड़ा में नमाज पढ़ने पर कानूनी विरोधी है, तो फिर बीजेपी सांसद मेधा कुलकर्णी और हिंदूवादी संगठनों ने गोमूत्र से किया गया शुद्धिकरण कानून विरोधी क्यों नहीं है. पुलिस के मुताबिक, नमाज जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध है तो गोमूत्र से शुद्धिकरण करने को किस तरह से जायज ठहराया जा सकता है.
बीजेपी और हिंदूवादी संगठनों के इस रवैये को देखकर कांग्रेस का बड़ा बयान सामने आया. महाराष्ट्र कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने बीजेपी के इस कदम को पिछड़ी सोच और अंधभक्ति की नजीर बताई है. सचिन सावंत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "बीजेपी की यह हरकत देखकर सिर पीटने का मन करता है. ये लोग देश को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं, समझ से परे है? यह विरोध बेहद पिछड़ा और घटिया सोच को दिखाता है."
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि ऐतिहासिक शनिवारवाड़ा हमेशा से सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता की निशानी रही है. उन्होंने पोस्ट में लिखा, "शनिवारवाड़ा में कभी मस्तानी भी रहा करती थीं. पेशवाओं ने ही कभी महाराजा छत्रपति का झंडा उतारकर यूनियन जैक फहरा दिया था. अगर आज कोई औरत वहां खुदा का नाम ले लेती है तो तुम्हें परेशानी होने लगती है. क्या बीजेपी वालों को या हिंदूवादी संगठनों को किसी ने रोका है कि वहां बैठकर ध्यान मत लगाओ?"
मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करने पर बीजेपी और हिंदूवादी संगठनों को आड़े हाथों लेते हुए सचिन सावंत ने कहा, "शनिवारवाड़ा कई मायनों में खास है. इस किले में पेशवा काल के कई दरगाह मौजूद हैं और पेशवाओं को भी इससे कोई आपत्ति नहीं थी." उन्होंने आगे कहा, "यहीं पर जौवान पेशवा नारायणराव की बेरहमी से हत्या हुई थी. आज भी पुणे के लोग कहते हैं कि 'काका, माला वाचवा' (काका मुझे बचाओ) की आवाजें वहां सुनाई देती हैं."
बीजेपी के शुद्धिकरण अभियान पर तंज कसते हुए सावंत ने लिखा, "अगर ईश्वर का नाम लेना ही अच्छा है तो तुम भी वहीं बैठकर 'राम राम' क्यों नहीं जपते? दरअसल, शनिवारवाड़ा में जितना कुछ घट चुका है, तुम्हारी तर्कशक्ति से तो पूरे वाड़े को गोमूत्र से धो देना चाहिए ताकि जनता समझ सके कि तुम्हारी सोच कितनी पिछड़ी और अंधविश्वासी है." वहीं, स्थानीय बहुसंख्यक समुदाय के लोगों ने बीजेपी राज्यसभा सांसद के शुद्धिकरण अभियान पर नाराजगी जताते हुए कहा कि किसी दूसरे समुदाय के महज नमाज पढ़ने से जगह अशुद्ध कैसे हो सकती है, बीजेपी के लोग सिर्फ अपनी सियासी रोटी सेंक रहे हैं.