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Ajmer News Today: राजस्थान के अजमेर में सूफ़ीवाद का अनोखा नजारा देखने को मिला है. ब्राजील से आए 110 लोगों का एक बड़ा डेलीगेशन अजमेर शरीफ दरगाह पहुंचा, जहां उन्होंने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैहि की दरगाह पर हाजिरी दी और चादर पेश की. यह डेलिगेशन सूफीवाद और चिश्तिया सिलसिले की तालीम हासिल करने के मकसद से भारत आया है.
सूफीवाद से प्रभावित यह डेलीगेशन कई देशों के सफर के बाद भारत पहुंचा है. मिली जानकारी के मुताबिक, भारत से पहले यह डेलिगेशन तुर्की, बुखारा और समरकंद का सफर करने के बाद अजमेर शरीफ पहुंचा है. इसमें ब्राजील, मेक्सिको, अर्जेंटीना सहित कई दक्षिण अमेरिकी देशों के सदस्य शामिल हैं. डेलिगेशन के प्रमुख डॉक्टर मर्सियोल ओर्बर अपने 110 साथियों के साथ इस पाक सफर की अगुवाई कर रहे हैं.
अजमेर पहुंचने पर दरगाह के खादिम सय्यद जहूर महाराज ने उन्हें जियारत कराई और सय्यद फरीद महाराज ने उनके लिए दुआ की. डेलीगेशन के सदस्यों ने दरगाह में गुलदस्ते और चादर पेश कर दुनिया में अमन, सुकून, खुशहाली और अपनी जिंदगी में कामयाबी की दुआ मांगी. गैर मुल्की मेहमानों का दरगाह खुद्दामीन की ओर से गर्मजोशी से इस्तकबाल किया गया. उनके सम्मान में सूफियाना कव्वाली की महफिल का भी आयोजन किया गया, जिसमें आध्यात्मिक माहौल के बीच मेहमानों ने सूफी संगीत का लुत्फ लिया.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दक्षिण अमेरिका के कई देशों में चिश्तिया सिलसिले और ख्वाजा गरीब नवाज के पैगाम को पसंद किया जाता है. वहीं, सूफ़ी संतों की रूहानी तालीम को नजदीक से जानने के लिए वहां से बड़ी संख्या में लोग भारत आते रहते हैं. इस डेलीगेशन के सदस्यों ने बताया कि वे इस्लाम की बारीकियों और औलिया–ए–कराम के पैगाम को समझना चाहते हैं और सूफी मार्ग पर चलने की प्रेरणा लेकर जा रहे हैं.
अजमेर शरीफ पहुंचे इस डेलिगेशन के सदस्यों का यह तीसरा सफर है. उनका कहना है कि हर बार यहां आने पर उन्हें दिली सुकून और रूहानी सुकून मिलता है. दरगाह ख्वाजा गरीब नवाज के आस्ताने पर इस वक्त दुनिया के हर कोने से जायरीन का आना एक बार फिर साबित करता है कि इंसानियत और मोहब्बत का पैगाम सरहदों से कहीं बड़ा है.