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Uttar Pradesh News: समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी के भाई रिजवान सोलंकी को तीन साल के बाद जमानत मिल गई है. रिजवान सोलंकी को जेल से रिसीव करने के लिए उनकी माँ खुर्शीदा बानो और परिवार के अन्य लोग पहुंचे थे. जमानत के बाद रिजवान सोलंकी ने कहा कि वह पिछले तीन वर्षों से बेगुनाही की सजा काट रहे थे.
दरअसल, सपा के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी और उनके भाई रिजवान सोलंकी को गैंगस्टर ऐक्ट के तहत 2 दिसंबर, 2022 जेल भेज दिया गया था. पिछले 34 महीनों से इरफान सोलंकी कानपुर जेल में बंद हैं और रिजवान सोलंकी महराजगंज जेल में बंद थे. इस मामले में हाई कोर्ट ने दोनों भाइयों की जमानत मंजूर की है. बीते सोमवार को रिजवान सोलंकी को जेल से रिहा कर दिया गया. वहीं, कुछ ही दिनों में पूर्व विधायक इरफान सोलंकी भी जेल से बाहर आ सकते हैं.
जेल से रिहाई के बाद रिजवान सोलंकी सबसे पहले अपने पिता हाजी मुश्ताक सोलंकी की बड़ी ईदगाह स्थित कब्रगाह पहुंचे. रिजवान ने कहा- तीन साल बेगुनाही की सजा काटी, अपनी मां, बच्चों और परिवार से दूर रहा. इस दौरान उनकी आंखों से आंसू छलक आए. उन्होंने फफकते हुए कहा कि जेल में मां से एक जालीनुमा खिड़की से मुलाकात होती थी. रिजवान सोलंकी ने कहा कि वह अपनी मां को छू भी नहीं सकते थे. उन्होंने कहा कि वह अपने बच्चों को देख नहीं पाते थे. उन्होंने कहा कि आज घर जाकर अपनी माँ से सिर पर हाथ रखवाऊंगा.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 17 सितंबर को इरफान, रिजवान, शौकत पहलवान, एजाज उर्फ अज्जन, मुरसलीन भोलू, इजराइल आटेवाला के खिलाफ एमपी/एमएलए कोर्ट में आरोप तय किए गए थे. जिसके बाद 25 सितंबर को इरफान व रिजवान सोलंकी को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी. रिजवान सोलंकी ने कहा कि आज मुझे अपने परिवार के साथ और अपनी माँ के साथ मिलने का और बैठने का मौका मिला है.
उन्होंने कहा कि वह जिस जगह से आ रहे हैं, वहां जब उनकी माँ उनसे मिलने आती थी तो वह अपनी माँ की अंगुली तक नहीं पकड़ पाते थे. उन्होंने कहा कि जाली बहुत दूर होती थी तो सही से मिल भी नहीं पाते थे, न ही आंखे मिला पाते थे. उन्होंने इस फैसले के लिए न्यायालय का शुक्रियादा किया.
रिजवान सोलंकी ने कहा कि उनकी पूरी ज़िंदगी खत्म हो गई थी, तीन साल की ज़िंदगी बहुत बड़ी ज़िंदगी होती है. उन्होंने कहा कि वह बेगुनाह होकर भी जेल गए थे इसीलिए बहुत तक़लीफ होती थी. लेकिन फिर नमाज़ के ज़रिए अल्लाह से बात करते थे. रिजवान सोलंकी ने कहा कि ऊपर वाले से ख़ूब रो-रो के दुआ करते थे कि मुझे इंसाफ ज़रूर दीजिएगा, क्योंकि आपको तो हर चीज़ हक़ीक़त मालूम है.