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Assan News: देश के सबसे विवादित मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अपने कथित जहरीले और आपत्तिजनक बयानों को लेकर कानून के शिकंजे में हैं. असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अक्सर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कथित तौर पर बार-बार के आपत्तिजनक और नफरत भरे भाषण देते रहे हैं. इन नफरती और आपत्तिजनक भाषणों के खिलाफ गुवाहाटी हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं. इस पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने अहम आदेश दिए हैं.
इन सभी याचिकाओं पर गुरुवार (26 फरवरी) को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने सुनवाई की और फिर हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ नोटिस जारी किया है. अदालत ने अपने नोटिस में कहा कि उनके बयान 'विभाजनकारी प्रवृत्ति' दर्शाते हैं. इस मामले में सिर्फ मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ही नहीं, बल्कि भारत सरकार, असम राज्य सरकार और असम के पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है. अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में तय की है.
यह मामला उस समय हाईकोर्ट में पहुंचा, जब सुप्रीम कोर्ट ने हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया था. याचिकाएं एक वायरल वीडियो को लेकर दायर की गई थीं, जिसमें कथित तौर पर हिमंता बिस्वा सरमा को मुस्लिम समुदाय के लोगों की ओर राइफल से निशाना साधते और गोली चलाते हुए दिखाया गया था. हालांकि, इस विवादित वीडियो को बाद में असम भारतीय जनता पार्टी की सोशल मीडिया टीम ने अपने ऑफिशियल हैंडल से डिलीट कर दिया था.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिमंता बिस्वा सरमा पर आरोप है कि उन्होंने असम में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कई बार अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है. जनवरी में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि राज्य में सिर्फ 'मियां' (बांग्ला बोलने वाले मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अपमानजनक शब्द) लोगों को ही बेदखल किया जा रहा है.
इतना ही नहीं हिमंता बिस्वा सरमा ने कथित तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को 'मियां' समुदाय के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए हौसलाअफजाई करने की बात भी स्वीकार की थी. उनका कहना था कि इन कदमों का मकसद 'मियां मुसलमानों' को परेशान करना है और यह संदेश देना है कि 'असमियां लोग अभी भी यहां मौजूद हैं."
इस दौरान हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था कि "जो भी मियां मुसलमानों को परेशान कर सकता है, वह करे. अगर रिक्शे का किराया 5 रुपये है, तो उन्हें सिर्फ 4 रुपये ही दो. जब तक उन्हें परेशानियां नहीं होंगी, वे असम नहीं छोड़ेंगे. ये मुद्दे नहीं हैं." सरमा ने कहा था कि "मुसलमानों के खिलाफ वोटर लिस्ट में आपत्ति दर्ज कराएं. अतिक्रमण वाली जमीनों से उन्हें हटाये, जिससे वह असम छोड़कर चले जाएं. वह और बीजेपी सीधे तौर पर मियांओं के खिलाफ हैं."
हालांकि, विवादित वायरल वीडियो जब असम बीजेपी के ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट किया गया, तो दुनियाभर में इसकी आलोचना शुरू हो गई. विवादित वीडियो को लेकर जब मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि उन्हें इस तरह के किसी भी वीडियो की जानकरी नहीं है.
इसके अलावा, हिमंता बिस्वा सरमा ने यह भी कहा था कि उनके बयान हमेशा संवैधानिक अधिकारों के दायरे में होते हैं. सफाई देते हुए हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था कि "अगर मेरे खिलाफ कोई मामला दर्ज हुआ है तो मुझे गिरफ्तार कर लिया जाए. मुझे कोई आपत्ति नहीं है. मैं जेल जाने के लिए तैयार हूं. मैं हमेशा अपनी बात पर कायम रहूंगा."