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Gaza University Reopen: इजराइल के जरिए किए गए व्यापक हमलों और शिक्षा ढांचे के बड़े हिस्से के तबागह हो जाने के दो साल बाद, गाज़ा की इस्लामिक यूनिवर्सिटी ने धीरे-धीरे फिर से ऑफलाइन क्लासें शुरू कर दी हैं. कई इमारतें अब भी जर्जर हैं या मलबे में तब्दील हो चुकी हैं, लेकिन इसी खंडहर के बीच सैकड़ों छात्र पढ़ाई के लिए वापस लौट आए हैं. यह गाज़ावासियों की शिक्षा और ज़िंदगी को फिर से खड़ा करने की मजबूत इच्छाशक्ति को दिखाता है.
शनिवार को विश्वविद्यालय में पढ़ाई का पहला दिन रहा. दो साल तक युद्ध और तबाही के चलते पढ़ाई पूरी तरह ठप थी. बीच-बीच में ऑनलाइन पढ़ाई की कोशिश की गई, लेकिन लगातार विस्थापन, बिजली कटौती और घरों के तबाह होने की वजह से यह काफी मुश्किल हो रहा था.
गाज़ा मीडिया ऑफिस के अनुसार, इजरायली हमलों में 165 स्कूल, यूनिवर्सिटी और शैक्षणिक संस्थान ध्वस्त हुए हैं, जबकि 392 को आंशिक नुकसान पहुंचा है. इससे गाज़ा का शिक्षा ढांचा लगभग पूरी तरह चरमरा गया है.
यूनिवर्सिटी की कई इमारतों में उन परिवारों ने पनाह ले रखी है जिनके घर हमलों में तबाह हो गए. विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि इन परिवारों के लिए जल्द से जल्द वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराए जाएं, ताकि परिसर का उपयोग पढ़ाई के लिए सुचारू रूप से हो सके.
मीडिया ऑफिस ने बताया कि गाज़ा को अभी भी 3 लाख टेंट और प्रीफैब्रिकेटेड घरों की जरूरत है, ताकि तबाह हुए इलाकों में लोगों को रहने की जगह मिल सके. इस्लामिक यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष असअद यूसुफ असअद ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया. उन्होंने कहा, "हम शिक्षा की ओर लौट रहे हैं, जबकि पीछे बहुत गहरी त्रासदी और विनाश छूट गया है. फिलिस्तीनी हमेशा जीवन और शिक्षा से प्यार करते हैं.
असअद ने बताया कि विश्वविद्यालय की कई मुख्य इमारतें पूरी तरह ध्वस्त हो गई थीं. युद्ध के दौरान भी 4,000 छात्रों ने ऑनलाइन माध्यम से अपनी पढ़ाई पूरी की और अब यूनिवर्सिटी अक्टूबर 2023 के बाद पहली बार नए छात्रों को कैंपस में ले रही है.
मेडिकल फैकल्टी की छात्रा मलाक अल-मुकयद ने कहा,"मैं मेडिसिन पढ़ रही हूं और आज पहली बार युद्ध के बाद कैंपस में कक्षाओं में आए हैं. यूनिवर्सिटी को भारी नुकसान हुआ था, लेकिन फिर भी इमारत को तैयार किया गया. भीड़ है, लेकिन हम खुश हैं कि पढ़ाई शुरू हो गई." उन्होंने कहा कि मेडिसिन एक प्रैक्टिकल विषय है, इसलिए क्लास में उपस्थित होना जरूरी है. हम सब गर्व और उत्साह के साथ यहां आए हैं.
एक अन्य छात्रा समा रदी ने कहा कि यह फेस टू फेस क्लास का पहला दिन है. इतनी तबाही और बमबारी के बावजूद हम क्लास में बैठे हैं. मुझे अपने देश और अपनी यूनिवर्सिटी पर गर्व है, जिसने इतनी बड़ी तबाही के बाद खुद को फिर से खड़ा किया.
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