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Ghaziabad Madarsa News: उत्तर प्रदेश में सालों पुराना एक और मदरसा शासन प्रशासन की राडार पर है. केंद्रीय राजधानी दिल्ली से महज कुछ दूरी पर गाजियाबाद की मस्जिद-मदरसा फलाह-ए-दारिन (एफ डी) जूनियर हाई स्कूल का मामला दिन-ब-दिन उलझता जा रहा है. एक तरह इस मदरसे को गिराने के लिए नगर निगम अड़ा हुआ है तो दूसरी तरफ कोर्ट ने किसी भी तरह के डिमोलिशन की कार्रवाई पर स्टे लगा दिया है.
यह पूरा मामला गाज़ियाबाद शहर के केला भर्ता इलाके में स्थित मस्जिद-मदरसा फलाह-ए-दारिन (एफ डी) जूनियर हाई स्कूल का है. एक तरफ नगर निगम इस मदरसे को तोड़ने के लिए तैयार है, जिससे यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है. बताया जा रहा है कि नगर निगम मदरसे को अपनी मिल्कियत में शामिल करना चाहता है, लेकिन स्थानीय लोग और मदरसा प्रबंधन समिति इसके खिलाफ है और नगर निगम के मंसूबों को कानूनी तरीके से रोक रहा है.
इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि मदरसा सरकार के जरिये मान्यता प्राप्त है. यूपी सरकार ने साल 2001 में 31 मदरसों को गैर-सरकारी मान्यता प्राप्त और अल्पसंख्यक संस्था घोषित किया था. इन 31 स्कूलों को अल्पसंख्यक संस्था बनाने के लिए कई सरकारी आदेश और कमेटियां बनाई गईं. 13 जून 1997 को बेसिक एजुकेशन के सेक्रेट्री की अध्यक्षता में बनी समिति ने गहन जांच के बाद अपनी रिपोर्ट पेश की.
कमेटी की सिफारिश की बुनियाद पर 14 फरवरी 2001 की बैठक में मदरसों को मान्यता देने के योग्य माना गया. जिस पर विचार करने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इन्हें मान्यता प्रदान की और साथ ही अल्पसंख्यक संस्थान घोषित किया. मदरसा फलाह-ए-दारिन (एफ डी) जूनियर हाई स्कूल के अध्यक्ष फारूक चौधरी और इसके मेंबर नाज़िमुद्दीन ने कई अहम खुलासे किए.
राष्ट्रीय सहारा में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, मदरसा के अध्यक्ष फारूक चौधरी ने बताया कि उन्होंने दर्जनों वैद्य दस्तावेज अदालत में पेश किए और मदरसे के खिलाफ चल रही नगर निगम की कार्रवाई को रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया. अदालत ने सभी साक्ष्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद नगर निगम की कार्रवाई पर स्टे (स्थगन आदेश) लगा दिया.
फारूक चौधरी ने बताया कि मदरसे में पहले 300 से 400 छात्र पढ़ते थे, लेकिन नगर निगम की कथित गलत हरकतों की वजह से छात्रों की संख्या धीरे-धीरे कम होती चली गई. उन्होंने बताया कि मामला अभी भी अदालत और वक्फ ट्रिब्यूनल में लंबित है. हाल ही में अदालत ने आदेश दिया कि मदरसे को तोड़ा न जाए और इस आदेश से प्रबंधन समिति को भी आगाह कराया गया.
इसके बावजूद नगर निगम के कुछ अधिकारी और कर्मचारी मदरसे को विवादित बताते हुए इसे तोड़ने पर आमाद हैं. अदालत ने मामला संख्या 107/2025, मो. फारूक चौधरी बनाम नगर निगम गाजियाबाद में 3 सितंबर 2025 को स्टे आदेश जारी किया था. नगर निगम की इस कार्यप्रणाली से स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है और यह कभी भी सामने आ सकता है.
मदरसा प्रशासन ने नगर निगम के जरिये 10 लाख रुपये की मांग को भी ठुकरा दिया और पूरे मामले की जानकारी सरकार को दे दी है. मूल रूप से मामला नगर निगम की जमीन पर कब्जे की कोशिश और मदरसा प्रबंधन की मान्यता को लेकर है. कोर्ट की स्टे ऑर्डर के बावजूद नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों मदरसे को हटाने पर अड़े हुए हैं.