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Mumbai News Today: भारत में हालिया कुछ सालों से दक्षिणपंथी संगठन और इस विचारधारा से प्रभावित शैक्षणिक संस्थान लगातार मुस्लिम छात्रों के खिलाफ विवादित आदेश देते रहे हैं. कर्नाटक में साल 2022 में एक शैक्षणिक संस्थान ने मुस्लिम छात्राओं के हिजाब या बुर्का पहने पर प्रतिबंध लगाया दिया. इसको लेकर देशभर में हंगामा हुआ और अब यह विवाद महाराष्ट्र में पहुंच चुका है. हालांकि, इससे पहले मुंबई के कुछ कॉलेजों में बुर्के पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, लेकिन सिर्फ हिजाब लगाने की इजाजत दी थी.
मुंबई के एक और कॉलेज ने बुर्के पर पाबंदी लगा दी. इसकी वजह से कई मुस्लिम छात्राएं अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रही हैं और वह कॉलेज आने से कतरा रही हैं. दरअसल, गोरगांव स्थित विवेक विद्यालय जूनियर कॉलेज में ड्रेस कोड में किए गए बदलाव के बाद विवाद खड़ा हो गया है. कॉलेज प्रशासन ने क्लास के अंदर बुर्का पहनने पर रोक लगा दी है, जबकि लंबे समय से बुर्का पहनकर क्लास में आने की इजाजत थी.
आमतौर पर मुंबई के कॉलेजों में रिप्ड जींस, शॉर्ट्स या क्रॉप टॉप पर प्रतिबंध देखने को मिलता है, लेकिन इस संस्थान ने अब मजहबी पहचान दिखाने वाले बुर्का और नकाब को भी निषिद्ध सूची में शामिल कर दिया है. लेकिन हिजाब और हेडस्कार्फ पहनने की इजाजत अभी भी जारी है. प्रशासन का कहना है कि मजहबी पहचान को प्रदर्शित करने वाले परिधान से सांस्कृतिक पहचान सामने आती है, जिसे वह टालना चाहते हैं.
कुछ मुस्लिम छात्राओं की गलीन्यूज पोर्टल ने वीडियो शेयर की है. यह वीडियो वायरल होते ही मामला और तूल पकड़ने लगा. वीडियो में बुर्का पहनकर आई छात्राओं को कॉलेज गेट पर रोकते हुए दिखाया गया है. बाद में छात्राओं को प्रिंसिपल से मिलते हुए भी देखा गया, जहां प्रिंसिपल इस फैसले को वापस लेने के लिए तैयार नहीं दिखाई पड़ीं.
कई छात्राओं ने बताया कि वे अब कॉलेज गेट तक बुर्का पहनकर आती हैं और वॉशरूम में जाकर ड्रेस बदलती हैं. छात्राओं का कहना है कि क्लास खत्म होने के बाद वे लोग फिर से बुर्का पहनकर घर निकलती हैं. एक छात्रा ने मिड डे से बातचीत में चौंकाने वाला दावा किया. छात्रा का कहना है कि "मैंने जिंदगीभर बुर्का पहना है. क्लास में बगैर बुर्के के बैठना असहज लगता है." फिलहाल यह प्रतिबंध सिर्फ जूनियर कॉलेज सेक्शन पर लागू है, जबकि सीनियर कॉलेज में ऐसी कोई रोक नहीं है. छात्राओं का दावा है कि जब उन्होंने इस नियम पर सवाल उठाए, तो उनसे कहा गया कि अगर ड्रेस कोड स्वीकार नहीं है तो एडमिशन कैंसल करा लें.
फ्री प्रेस जर्नल के मुताबिक, 1 दिसंबर को कुछ छात्राएं AIMIM की अधिवक्ता जहांआरा शेख के साथ गोरगांव वेस्ट स्थित टीन डोंगरी पुलिस स्टेशन पहुंचीं. वहां प्रिंसिपल को बुलाकर चर्चा की गई. जहांआरा शेख ने बताया कि अभी तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है. उन्होंने कहा, "हमने प्रिंसिपल से नियम वापस लेने की मांग की, लेकिन उन्होंने कहा कि पहले मैनेजमेंट से बातचीत करनी होगी. दो दिन बाद फिर से बैठक होगी." कॉलेज मैनेजमेंट की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई ऑफिशियल बयान जारी नहीं किया गया है.