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कानपुर तक पहुंची दिल्ली ब्लास्ट की आंच, GSVM कॉलेज ने इस जगह से हटाया डॉ शाहीन का नाम

GSVM College Remove Delhi Blast Accused Name: दिल्ली ब्लास्ट केस में गिरफ्तार डॉ. शाहीन सईद सईद की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, उसका असर कानपुर तक दिखने लगा है. संदिग्ध गतिविधियों की पड़ताल के बीच GSVM मेडिकल कॉलेज ने विवाद से बचने के लिए फार्माकोलॉजी विभाग के बोर्ड से डॉ शाहीन का नाम हटा दिया है.

 

दिल्ली कार ब्लास्ट केस के आरोपी का नाम GSVM मेडिकल कॉलेज ने हटाया
दिल्ली कार ब्लास्ट केस के आरोपी का नाम GSVM मेडिकल कॉलेज ने हटाया

Delhi Car Blast Case link Kanpur: दिल्ली ब्लास्ट मामले में जांच एजेंसिया ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही हैं. यह जांच का दायरा कई शहरों तक फैल चुका है. इस मामले में जांच एजेंसियों की गिरफ्त में आई लखनऊ की डॉ. शाहीन सईद पर चल रही कार्रवाई का असर अब कानपुर तक दिखाई देने लगा है. कानपुर स्थित गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (GSVM) ने फार्माकोलॉजी विभाग के बोर्ड से डॉ. शाहीन सईद सईद का नाम हटा दिया है.

गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शुक्रवार (14 नवंबर) को विभागीय बोर्ड में संशोधन करते हुए डॉ शाहीन का नाम हटा दिया गया. डॉ शाहीन बीते कई सालों से फार्माकोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष के पद पर तैनात थी. इसी वजह से डॉ शाहीन का नाम गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज के बोर्ड पर लिखा गया था.  

इस संबंध में कॉलेज सूत्रों के मुताबिक, यह कदम दिल्ली पुलिस और यूपी एटीएस की जांच में सामने आए तथ्यों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. GSVM प्रशासन का मानना है कि कॉलेज का नाम किसी भी तरह की गलत पहचान, विवाद या संदिग्ध संदर्भ से न जोड़ा जाए, इसलिए तत्काल प्रभाव से यह कार्रवाई की गई है.

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सूत्रों ने बताया कि ATS और क्राइम ब्रांच की टीमों ने कैंपस के साथ कार्डियोलॉजी विभाग के हॉस्टल की भी जांच की है. दोनों एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि डॉ. शाहीन सईद सईद के कॉलेज में कार्यकाल के दौरान किसी संदिग्ध गतिविधि के संकेत तो नहीं मिले थे. जांच टीम यह भी खंगाल रही है कि उनके संपर्क में कौन-कौन लोग थे और क्या विभाग की पुरानी गतिविधियों या रिकॉर्ड में किसी तरह का कोई महत्वपूर्ण लिंक या सुराग सामने आता है. 

कॉलेज के विभागीय बोर्ड में संशोधन भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है. जांच एजेंसियां, डॉ. शाहीन सईद के कॉलेज में कार्यकाल का विस्तृत विवरण, उसकी सरगर्मियां, संपर्क और विभाग के अन्य स्टाफ व छात्रों के साथ उनके संबंधों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं कॉलेज से जुड़ा कोई इनपुट इस केस में प्रासंगिक तो नहीं है.

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