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संभल में रिपीट होगी फतेहुपर स्टोरी? जामा मस्जिद में परिक्रमा के लिए अड़ा हरि हर सेना

Hindu Gropus Parikarma on Sambhal Jama Masjid: संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर हिंदूवादी संगठनों की परिक्रमा की घोषणा से तनाव बढ़ने की आशंका है. प्रशासन ने अभी तक इजाजत देने को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं दिया है. हिंदूवादी संगठनों के इस ऐलान से अल्पसंख्यकों में दहशत फैल गई है, लोग फतेहपुर जैसी घटना दोहराए जाने को लेकर चिंतित हैं.

 

संभल की ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद (फाइल फोटो)
संभल की ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद (फाइल फोटो)

Sambhal Shahi Jama Masjid News: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में शाही जामा मस्जिद को लेकर एक बार फिर विवाद शुरू हो गया है. हिंदूवादी संगठनों ने ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद के आस पास पूजा अर्चना करने और परिक्रमा करने का ऐलान किया है. अब सबकी नजरें पुलिस और प्रशासन पर टिकी हुई हैं कि वह सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों पर क्या कार्रवाई करते हैं. लोगों को डर है कि फतेहपुर के अबू नगर में स्थित नवाब अब्दुल समद का मकबरा की तरह हिंदूवादी संगठन यहां भी तोड़फोड़ न करें और पुलिस मूक दर्शक बनी देखती रहे. 

दरअसल, संभल की शाही जामा मस्जिद को हिंदूवादी संगठन श्री हरि हर मंदिर होने का दावा कर रहे है. हरि हर सेना नाम के संगठन के संस्थापक और केला देवी मंदिर के महंत ऋषि राज गिरि ने 19 नवंबर को शाही जामा मस्जिद की विवादित जगह के आसपास परिक्रमा करने का ऐलान किया है. ऋषि राज गिरि ने कहा कि उनकी संस्था एक दिन की 'हरि हर मंदिर पदयात्रा' आयोजित करेगी, जिसमें कथित विवादित परिसर की ढाई किलोमीटर परिक्रमा शामिल होगी.

ऋषि राज गिरि ने बताया कि पदयात्रा सुबह 10 बजे शुरू होगी. इस दौरान हरि हर सेना की टीम पहले कथित विवादित परिसर की बाहरी सीमाओं के चारों ओर ढाई किलोमीटर पैदल चलेगी. उसके बाद यह यात्रा मोती नगर के रास्ते होते हुए केला देवी मंदिर वापस लौटेगी. ऋषि राज गिरि ने कहा कि यह पदयात्रा पिछले साल 19 नवंबर को साइट पर हुए सर्वे के एक साल पूरा होने के मौके पर की जा रही है.

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केला देवी मंदिर के महंत ऋषि राज गिरि ने दावा किया, "हमारा संदेश साफ है. यह हरि हर मंदिर था, है और रहेगा. मामला अदालत में है और हम अदालत की प्रक्रिया का सम्मान करते हैं. हम सिर्फ हरि हर मंदिर परिसर का चक्कर लगाएंगे." जब ऋषि राज गिरि से पूछा गया कि क्या प्रशासन से इस यात्रा की इजाजत ली गई है, तो उन्होंने कहा कि इस सामाजिक, धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधि को लेकर अभी तक प्रशासन से किसी तरह की औपचारिक बातचीत नहीं हुई है.

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