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Haridwar News Today: कहते हैं कि एक अच्छा टीचर सिर्फ पढ़ना ही नहीं सिखाता है बल्कि अच्छाई, अनुशासन और जिंदगी के सही मूल्यों की सीख भी देता है. समाज को संवेदनशील, जिम्मेदार और तालीमयाफ्ता बनाने में टीचर का किरदार सबसे अहम होता है. लेकिन इसके उलट उत्तराखंड के दो टीचर्स के रवैये ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है.
यह खौफनाक और दिल दहला देने वाली घटना उत्तराखंड के हरिद्वार से सामने आई है, जहां एक सात साल के मुस्लिम बच्चे को महज जो दो दिन स्कूल न जाने की ऐसी सजा मिली, जिसे सुनकर रूह कांप उठती है. टीचरों ने मासूम की इतनी बेरहमी से पिटाई की कि उसका हाथ टूट गया और जिस्म पर कई गंभीर चोटें आई हैं. यह अमानवीय घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है.
मिली जानकारी के मुताबिक, हरिद्वार जिले के आलमपुर गांव के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल में पीड़ित बच्चा क्लास एक में पढ़ता है. सात साल का यह मुस्लिम बच्चा दो दिन से स्कूल नहीं गया था. 11 सितंबर को जब वह स्कूल लौटा तो उसके साथ टीचरों ने ऐसा सलूक किया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी.
स्कूल के टीचर राकेश सैनी और प्रिंसिपल रविंद्र ने मासूम बच्चे को बुरी तरह पीटा. मासूम के जिस्म पर कई जगह गहरे जख्म के निशान हैं, जबकि त्वचा नीली पड़ गई है. इस पिटाई की वजह से बच्चा बेहोश सा होकर बिस्तर पर लेटने को मजबूर है और घटना से काफी सदमे में है. बच्चे के जख्म दिखाने की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है.
पीड़ित बच्चे की वालिदा ने बताया कि उनका बेटा दो दिन स्कूल नहीं गया था, लेकिन स्कूल से लौटते ही उसके साथ जालिमाना सलूक किया गया. इस मामले में पीड़ित मासूम के परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. इसमें लिखा है कि राकेश सैनी नाम के टीचर ने राक्षसों जैसा बर्ताव करते हुए मासूम के चेहरे को जूतों से दबा दिया, जबकि प्रिंसिपल रविंद्र ने बच्चे की बेरहमी से पिटाई की.
सियासत में छपी खबर के मुताबिक, पुलिस को दी गई शिकायत में आगे बताया गया है कि राकेश सैनी और रविंद्र की पिटाई से मासूम का हाथ फ्रैक्चर हो गया है. इसके अलावा कमर और पीठ पर गहरे चोट के निशान पड़ गए हैं. मुस्लिम बच्चे की पिटाई के बाद दोनों आरोपियों ने उसे धमकी देते हुए कहा, 'भाग जा, नहीं तो तुझे मार देंगे.'
डरा-सहमा बच्चा घायल अवस्था में घर पहुंचते टीचरों के वहशियाना रवैये के जिक्र अपने मां-बाप से की. बच्चे की हालत देखकर मां-बाप के पैरों तले से जमीन खिसक गई. इस मामले में पीड़ित शब्बीर की शिकायत पर पुलिस ने टीचर और प्रिंसिपल के खिलाफ धारा 75 (यौन उत्पीड़न), 115 (2) (जानबूझकर चोट पहुंचाना) और 351 (2) (आपराधिक धमकी) के तहत मुकदमा दर्ज किया है.
हालांकि, अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. बच्चे की मां ने बताया कि उसकी स्वास्थ्य स्थिति कुछ स्थिर है, लेकिन वह अब स्कूल जाने से डर रहा है. यह मामला बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था की नाकामी की तरफ इशारा कर रहा है. वहीं, कई लोगों ने टीचरों पर धार्मिक पहचान की वजह से इतनी बुरी तरह से पिटाई के आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि इससे पहले भी इस स्कूल में बच्चे कई दिनों तक गैर- हाजिर रहें हैं, लेकिन उनके साथ इस तरह का अमानवीय बर्ताव नहीं किया गया.