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Assam News Today: असम की दक्षिणपंथी हेमंता बिस्वा सरमा सरकार लगातार अल्पसंख्यकों को हाशिये पर धकेलने के कवायद कर रही है. हालिया, दिनों उसकी मंशा जाहिर भी हो गई है, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तरफ से मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वाला आपत्तिजनक विज्ञापन जारी किया गया था. वहीं, उत्तराखंड के यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) की तर्ज पर अब असम की बीजेपी सरकार मुसलमानों को निशाना बनाने वाले कानून लाने की तैयारी में जुटी है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि राज्य सरकार नवंबर महीने में विधानसभा में कई विशेष कानून लाने जा रही है. इनमें सबसे प्रमुख 'पॉलिगामी' (एक से ज्यादा शादी) और 'लव जिहाद' से संबंधित कानून होंगे. हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि सरकार पॉलिगामी को लेकर सख्त रुख अपनाने जा रही है
इस दौरान हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट कहा कि अगर कोई शख्स बिना तलाक के दूसरी शादी करता है, तो उसके खिलाफ सात साल तक की सजा का प्रावधान किया जाएगा. हिमंता बिस्वा सरमा के इस ऐलान के बाद राज्यभर में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है. लोग इसे मुसलमानों को निशाना बनाने वाला कानून बता रहे हैं. विपक्ष ने सरकार की मंशा और नियति पर सवाल खड़ा करते हुए इसे विधानसभा चुनाव से पहले ध्रुव्रीकरण की साजिश बताया है.
मुस्लिम समुदाय के अशरफ अली ने कहा कि इस कानून से असम के मुसलमानों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि यहां मुसलमान तीन-चार शादी नहीं करते है. उन्होंने कहा कि असम के मुसलमान एक ही शादी से संतुष्ट हैं और पॉलिगामी जैसी प्रथा अब लगभग खत्म हो चुकी है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इस कानून के जरिए मुसलमानों को टारगेट करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं होगा.
वहीं, खुदाई खिदमतगार असम प्राण संगठन के अध्यक्ष और गुवाहाटी हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट इलियास अहमद ने भी सरकार की मंशा पर शक जताया है. इलियास अहमद ने कहा कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा जो पॉलिगामी कानून बनाने जा रहे हैं, उससे मुसलमानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि भारत में मुसलमानों का अपना 'मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड' मौजूद है, फिर भी असम के मुख्यमंत्री लगातार संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए अलग-अलग कानून लाने की बात करते हैं.
हिमंता बिस्वा सरमा को आड़े हाथों लेते हुए इलियास अहमद ने कहा, "मुख्यमंत्री विधानसभा में बहुमत के बल पर ऐसे कानून पारित करवा लेते हैं, जो एक खास समुदाय को निशाना बनाते हैं." उन्होंने कहा कि "असम के मुसलमानों में अब पॉलिगामी जैसी प्रथा नहीं है, लेकिन मुख्यमंत्री बार-बार मुसलमानों को टारगेट करते रहते हैं, जो पूरी तरह गलत है."
हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार की पॉलिगेमी कानून पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि पूरे राज्य में 23 जनजातियां रहती हैं. असम की कई जनजातियों में एक से ज्यादा शादी करने की प्रथा आज भी मौजूद है. मिकिर, करबी, कछारी, नागा, मिशिंग और डिमासा जनजातियों में आज भी एक से ज्यादा शादियों का प्रचलन है. इसी तहह देश में हिंदू मैरिज एक्ट 1995 पहले से लागू है जो हिंदू की एक से ज्यादा शादी करने पर रोक लगाती है.
अब सवाल उठता है कि हिमंता बिस्वा सरमा के नए पॉलिगेमी कानून में क्या इन जनजातियों पर भी रोक लगेगी और एक से ज्यादा शादी करने पर उन्हें भी जेल होगी. या फिर इन जनजातियों को छूट मिलेगी और यह कानून सिर्फ मुसलमानों को निशाना बनाते पारित किया जाएगा. हालांकि, मुसलमानों में भी एक से ज्यादा शादी करने के रिवाज कम हुआ है. पूरे देश में महज 1.9 फीसदी मुस्लिम ही एक से ज्यादा शादी करते हैं. इसके मुकाबले इसाई (2.1 फीसदी), हिंदू (2.3 फीसदी) और अनुसूचित जनजाति (2.4 फीसदी) पॉलीगेमी होते हैं.
(गुवाहाटी से शरीफुद्दीन अहमद के इनपुट पर आधारित)