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ASSAM: एक से ज्यादा शादी की तो हो सकती है इतने साल की सजा; टारगेट पर सिर्फ मुसलमान!

Polygamy Law in Assam: हिमंता बिस्वा सरमा सरकार असम में विवादित बहुविवाह विरोधी कानून को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में है. विपक्ष ने हिमंता सरकार पर ध्रुवीकरण और मुस्लिम समुदाय को टार्गेट करने का आरोप लगाया है. कानून में जनजातीय समुदाय को छूट मिलने से सियासी विवाद और तेज हो गया है, खासकर चुनाव से पहले.

 

सीएम हिमंता बिस्वा सरमा (फाइल फोटो)
सीएम हिमंता बिस्वा सरमा (फाइल फोटो)

Assam News Today: असम में अगले साल मार्च अप्रैल में विधानसभा चुनाव संभावित हैं. उससे पहले असम में सत्तारूढ़ बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार के मुखिया हिमंता बिस्वा सरमा पर लगातार धुव्रीकरण के इलज़ाम लगने शुरू हो गए हैं. इसकी वजह यह है कि हिमंता बिस्वा सरमा बैक टू बैट अल्पसंख्यकों को टार्गेट करने वाले विवादित कानून लाने की तैयारी कर रहे हैं. हालिया, कुछ माह में बड़े पैमाने पर मुस्लिम बहुल इलाकों में बुलडोजर कार्रवाई की गई है, जिससे ठंडक से पहले कई परिवार बेघर हो गए.

वहीं, अब हिमंता बिस्वा सरमा सरकार ने बीते इतवार (9 नवंबर) को ऐलान किया कि राज्य मंत्रिमंडल ने बहुविवाह (Polygamy) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने वाले एक नए विधेयक को मंजूरी दी है. इस कानून के तहत असम में एक से ज्यादा शादी करने का कसूरवार पाए जाने पर 7 साल तक की कठोर सजा का हो सकती है. हिमंता बिस्वा सरमा के इस ऐलान के बाद मानवाधिकार संगठन और विपक्षी दलों ने इस कानून पर सवाल उठाया और इसे मुस्लिम समुदाय को टार्गेट करने का आरोप लगाए हैं.

हिमंता सरमा के निशाने पर समुदाय विशेष? 

माना जा रहा है कि दक्षिणपंथी असम सरकार इस कानून के तहत छठी अनुसूची (Sixth Schedule) वाले क्षेत्रों के लिए विशेष छूट दे सकती है. छठी अनुसूची में असम के वे क्षेत्र आते हैं, जहां जनजातीय समुदायों की स्वशासन व्यवस्था लागू है. यहा पर 12.45 फीसदी आबादी जनजातीय समुदायों की है, जबकि बहुसंख्यक आबादी हिंदू है. असम में पहले से ही हिंदू मैरिज एक्ट- 1955 लागू है, इसमें बहुविवाह पर रोक है. हिंदू मैरिजे एक्ट में हिंदुओं के अलावा बौद्ध, जैन और सिख भी शामिल हैं और उन पर भी यह कानून लागू होता है. 

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2011 की जनगणना के मुताबिक, असम में 34.22 फीसदी मुस्लिम और 3.74 फीसदी इसाई समुदाय के लोग रहते हैं. हिंदू मैरिज एक्ट के तहत मुसलमान और इसाइयों को छोड़कर एक बड़ा वर्ग पर यह कानून लागू होता है, जबकि जनजातीय समुदाय पर यह कानून लागू नहीं होता है. नए बहुविवाह कानून में भी जनजातीय समुदायों को छूट मिलेगी. ऐसे में सिर्फ मुसलमानों की बड़ी आबादी रह जाती है, जिन पर अब नया कानून थोपने की साजिश के आरोप लग रहे हैं. हालांकि, मुसलमानों के लिए पहले से ही 'मुस्लिम पर्सनल लॉ' मौजूद है. 

25 नवंबर को विधानसभा में पेश होगा विधेयक

कैबिनेट बैठक के बाद गुवाहाटी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस कानून से जुड़ी कई बिंदुओं को शेयर किया. हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि इस बिल का नाम "The Assam Prohibition of Polygamy Bill-2025" रखा जाएगा. उन्होंने बताया कि यह विधेयक 25 नवंबर 2025 को असम विधानसभा में पेश किया जाएगा.

सीएम सरमा ने कहा, "आज असम कैबिनेट ने बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को मंजूरी दी है. इस कानून के तहत जो शख्स बहुविवाह का दोषी पाया जाएगा, उसे 7 साल तक की कठोर सजा हो सकती है."

पीड़ित औरतों के लिए बनेगा विशेष फंड

इस बिल की एक खास बात यह है कि सरकार ने बहुविवाह की पीड़ित औरतों के लिए एक अलग आर्थिक सहायता कोष बनाने का भी फैसला लिया है. हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि यह फंड उन औरतों की मदद के लिए बनाया जा रहा है, ताकि वे इस कानून की वजह से आर्थिक, सामाजिक या पारिवारिक संकट का सामना न करें और सम्मानपूर्वक जिंदगी जी सकें. हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, "सरकार पीड़ित औरतों को आर्थिक सहायता देगी. जरूरी मामलों में उन्हें वित्तीय मदद मिलेगी, ताकि कोई भी महिला अपनी जिंदगी में कठिनाई का सामना न करे."

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