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Aftab Ansari Case: झारखंड में बीते दिनों आफताब अंसारी नाम के एक मुस्लिन नौजवान की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी. आफताब की मौत के मामले में हर रोज बड़े खुलासे हो रहे हैं. यह मामला सामने आने के बाद झारखंड पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े होने लगे हैं, जहां प्रशासनिक मिलीभगत से एक बेगुनाह मुस्लिम शख्स की हिंदूवादी संगठनों की प्रताड़ना और पुलिस की पिटाई से मौत हो गई.
मृतक आफताब अंसारी झारखंड के रामगढ़ जिले के रहने वाले थे. इससे पहले 26 जुलाई को आफताब का शव रामगढ़ के रजरप्पा थाना क्षेत्र में दामोदर नदी के किनारे मिला था. पुलिस का दावा है कि आफताब अंसारी 24 जुलाई को पुलिस हिरासत में फरार हो गए थे. हालांकि, उनके भाई अल्ताफ अंसारी ने आरोप लगाया कि आफताब अंसारी की हत्या रामगढ़ पुलिस स्टेशन के प्रभारी और हिंदू टाइगर फोर्स के सदस्यों ने की थी.
अल्ताफ अंसारी ने बताया कि उनके भाई आफताब पर 23 जुलाई को पुलिस ने सेक्सुअल हरासमेंट का केस दर्ज किया था. इसी दिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था और जब थाने गए तो पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया था. उन्होंने बताया कि बाद में पुलिस ने बताया कि आफताब पुलिस हिरासत से 23 जुलाई को भाग गया था. अल्ताफ ने सवाल किया कि जब वह भाग गया था, तो इसकी जानकारी मुझे क्यों नहीं दी गई.
मिली जानकारी के मुताबिक, रामगढ़ से लगभग 10 किमी दूर लारी कला गांव के रहने वाले आफताब पर एक आदिवासी लड़की का नौकरी का झांसा देकर यौन शोषण करने और कथित तौर पर उसका धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश करने का आरोप लगे थे. एक वायरल वीडियो से पता चलता है कि 23 जुलाई को हिंदू टाइगर फोर्स के सदस्यों ने उस दुकान पर धावा बोल दिया जहां वह काम करते थे. हिंदू टाइगर फोर्स ने आफताब की बेरहमी से पिटाई की और फिर पुलिस के हवाले कर दिया, जिसे पुलिस रामगढ़ थाने ले गई.
मृतक के भाई अल्ताफ ने बताया कि जैसे ही उन्हें आफताब की गिरफ्तारी की खबर मिली, वह 24 जुलाई को रामगढ़ पहुंचे. पुलिस ने शुरुआत में हिरासत से इनकार किया, लेकिन बाद में दुकान मालिक शमीम अंसारी ने बताया कि पुलिस ने 23 जुलाई को आफताब और हिंदू टाइगर फोर्स के सदस्यों को 'दबाव में आकर' छोड़ दिया था. 25 जुलाई को आफताब की खोज की गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला.
अल्ताफ के मुताबिक, 26 जुलाई को परिवार और स्थानीय लोगों ने थाने जाकर प्रदर्शन किया, तब पुलिस ने बताया कि आफताब हिरासत से भाग गया. इसी दिन पास की एक नदी से एक शव मिला, जिसकी शिनाख्त आफताब के शव के रुप में हुई थी. परिजनों का आरोप है कि पुलिस और हिंदू संगठन की मिलीभगत से आफताब की हत्या की गई.
परिवार की शिकायत पर 26 जुलाई को आफताब की पत्नी सलेहा ने एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें हिंदू टाइगर फोर्स के 12 लोगों को नामजद किया गया है. हालांकि इतने दिनों बाद भी अब तक सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई है. जिसकी पहचान राजेश सिन्हा के रुप में हुई है, जबकि बाकी आरोपी अभी भी फरार है. पुलिस ने हिंदू टाइगर फोर्स से जुड़े बाकी आरोपियों को पकड़ने के लिए चार टीमों का गठन किया है.
इस मामले में पतरातू के तत्कालीन एसडीपीओ ने मामले में गलती मानी और थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है. पुलिस का कहना है कि वह आरोपियों को पकड़ने के लिए लगातार दबिश दे रही है. इस मामले एक एफआईआर आफताब की पत्नी ने जबकि दूसरी एफआईआर दुकान मालिक ने दर्ज कराई, जिसमें आफताब करते थे.