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Humayun Kabir News: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर एक बार फिर चर्चा में हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक आज वह अपने समर्थकों के साथ नई बाबरी मस्जिद में जुमा की नमाज अदा करने वाले हैं. इस दौरान वह शक्ति प्रदर्शन भी कर सकते हैं. इसके पीछे वजह उनकी नई पार्टी का गठन है. जिसका जनता नाम उन्नयन पार्टी रखा गया है.
गौरतलब है कि 6 दिसंबर को हुमायूं कबीर ने बेलडांगा में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद की आधारशिला रखी थी. इसके बाद 12 दिसंबर को वहां पहली जुमे की नमाज़ अदा की गई थी, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए थे. नमाज़ के वक्त तक इलाके में लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती गई थी और नमाज़ियों की कतारें आसपास के खेतों तक फैल गई थीं. इलाके में तनाव के हालात को देखते हुए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी.
बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद की नींव रखने के बाद हुमायूं कबीर राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गए. जब उन्होंने बाबरी मस्जिद की नीव रखने की बात कही थी तो टीएमसी ने उन्हें निलंबित कर दिया था. इसके बाद उन्होंने खुद की पार्टी बनाने का ऐलान किया था. हुमायूं कबीर इससे पहले कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और भाजपा से जुड़े रहे हैं और कई बार दल बदल चुके हैं.
नई पार्टी बनाने के बाद हुमायूं कबीर लगातार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ तीखे बयान दे रहे हैं. उन्होंने सार्वजनिक मंचों से कई बार राज्य सरकार और तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं. सोमवार को मुर्शिदाबाद में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी के नाम की घोषणा की थी.
इस दौरान उन्होंने कहा था कि जनता उन्नयन पार्टी 2026 के विधानसभा चुनाव लड़ेगी. हुमायूं कबीर ने यह भी साफ किया कि वह अपनी पार्टी के टिकट पर मुर्शिदाबाद की रेजिनगर और भरतपुर सीट से चुनाव लड़ेंगे. इसके अलावा उन्होंने कुछ अन्य सीटों पर भी उम्मीदवारों के नाम घोषित किए, जिनमें कोलकाता की बालीगंज सीट से निशा चटर्जी का नाम शामिल था.
हालांकि, बालीगंज सीट से उम्मीदवार के नाम की घोषणा के बाद निशा चटर्जी से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं. लोगों ने इन तस्वीरों और वीडियो को अश्लील करा दिया. जिसके बाद हुमायूं कबीर ने अपने फैसले में बदलाव किया और टिकट वापस ले लिया. नई पार्टी के गठन और धार्मिक कार्यक्रमों से जुड़े आयोजनों के चलते आने वाले दिनों में मुर्शिदाबाद की राजनीति और अधिक गरमाने की संभावना जताई जा रही है.
ऐसा माना जा रहा है कि हुमायूं कबीर ममता बनर्जी के लिए काफी नुकसानदे साबित हो सकते हैं. ये टीएमसी के भारी मात्रा में वोट काट सकते हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि हुमायूं के बाबरी वाले फैसले ने ममता के कोर वोटर्स को भी काफी मुतास्सिर किया है.