Iltija Mufti on Jammu Kashmir Arhama Encounter: जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में रशीद मुगल की मुठभेड़ में मौत पर विवाद गहराता जा रहा है. पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने इसे फर्जी बताकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. इससे पहले एलजी मनोज सिन्हा ने पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं.
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Jammu Kashmir News: जम्मू कश्मीर के गांदरबल जिले के अरहामा इलाके में 31 मार्च की रात को हुई मुठभेड़ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस कथित फर्जी मुठभेड़ की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं. इसमें रशीद मुगल नाम के एक नौजवान की मौत हो गई थी. जम्मू कश्मीर के सियासी गलियारों में यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. मुसलमान नौजवान की मौत पर गंभीर आरोप सामने आए हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने अरहामा में हुई मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए रशीद मुगल की हत्या पर जवाबदेही तय करने की मांग की है. उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद दावा किया कि मारे गए रशीद मुगल कोई आतंकी नहीं थे, बल्कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के सक्रिय कार्यकर्ता और समाज कल्याण से जुड़े एक्टिविस्ट थे.
VIDEO | Ganderbal Encounter: PDP leader Iltija Mufti claims, “Rashid Ahmad Mughal was innocent; protests are likely if the body is not returned within a week.” pic.twitter.com/gBzgqnEwhp
— Press Trust of India (@PTI_News) April 10, 2026
सेना के अधिकारी पर हत्या की साजिश रचने का आरोप
इस मौके पर इल्तिजा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि रशीद मुगल को गलत तरीके से "मिलिटेंट" करार दिया गया, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. उन्होंने इस पूरे मामले में एक सेना अधिकारी पर हत्या की साजिश रचने का गंभीर आरोप भी लगाया. उनका कहना है कि यह कोई सामान्य मुठभेड़ नहीं, बल्कि एक सोची-समझी कार्रवाई हो सकती है.
PDP नेत्री इल्तिजा ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की गैरमौजूदगी पर भी सवाल उठाए. इल्तिजा ने कहा कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद मुख्यमंत्री का सामने न आना और चुप रहना कई शंकाओं को जन्म देता है. इल्तिजा मुफ्ती ने साफ चेतावनी दी कि अगर एक हफ्ते के अंदर रशीद मुगल के परिवार को इंसाफ नहीं मिला और उनका शव वापस नहीं सौंपा गया, तो बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक परिवार का मामला नहीं है, बल्कि इंसाफ और सच्चाई की लड़ाई है.
क्या है मामला?
बता दें, 31 मार्च और 1 अप्रैल को दरम्यानी रात में गांदरबल के अरहामा में सेना और कथित आतंकियों के बीच मुठभेड़ की बात सामने आई थी. इस मुठभेड़ में रशीद मुगल नाम का नौजवान मारा गया था. सेना ने इसे आंतकियों के खिलाफ बड़ी कामयाबी करार दिया था. हालांकि, बाद में रशीद मुगल के परिजनों ने इस मुठभेड़ को फर्जी बताया. इसके बाद पूरे जम्मू कश्मीर में इसको लेकर हंगामा शुरू हो गया.
विवाद को तूल पकड़ता देख जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रशीद मुगल मुठभेड़ केस की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए. उपराज्यपाल ने हर हाल में पारदर्शी तरीके से 7 दिन में जांच पूरा करने के आदेश दि हैं. इस फैसले का बीजेपी ने भी स्वागत किया है, और बीजेपी प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि निष्पक्ष, पारदर्शी और निश्चित समय सीमा के भीतर होने वाली जांच न सिर्फ अवाम के यकीन को मजबूत करेगी, बल्कि यह भी साबित होगा कि प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में कोई भी आम आदमी असुरक्षित महसूस नहीं करेगा." PDP के दावे के बाद शासन प्रशासन में हड़कंप मच गया.
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