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नई दिल्ली: ट्रेन में दाढ़ी- टोपी वाले पैसेंजर से मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. राजनितिक दलों और विपक्ष ने इस घटना की तीखी आलोचना करते हुए इस घटना के जांच की मांग की है. इस घटना के बाद एमआईएम पार्टी ने भी इस मामले को उठाना शुरू कर दिया है, और कसूरवार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. घटना के दो दिन बाद शुरूआती जांच से जो तथ्य सामने आये हैं, उससे साफ़ पता चलता है कि भीड़ ने सिर्फ दाढ़ी- टोपी देखकर यात्री की पिटाई की थी.
ये वारदात उस वक़्त हुई जब मनमाड-काकीनाडा-शिरडी एक्सप्रेस हैदराबाद के हाफीजपेट रेलवे स्टेशन पर रुकी हुई थी. एसी कोच में लातूर जा रहे यात्री मोहम्मद इमरान की कथित तौर पर धार्मिक पहचान के आधार पर हमला किया गया. घटना संज्ञान में तब आया जब 11 फरवरी को हुई इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा.
इमरान ने बताया कि दाढ़ी और टोपी पहने होने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया. जब वो लोग एक दूसरे दाढ़ी- टोपी वाले यात्री पर हमला कर रहे थे तब इमरान ने उन्हें रोकने की कोशिश की थी, इसके बाद हमलावर भीड़ ने इमरान पर हमला कर दिया. उसकी दाढ़ी नोची और टोपी को सर से फेक दिया. भीड़ में से किसी ने उसका मोबाइल और 12 हज़ार कैश भी लूट लिया. हमलावर 15- 20 की तादाद में ट्रेन में घुसे थे. पीड़ित हाफिज मोहम्मद इमरान ने इलज़ाम लगाया है कि जब उनके साथ मारपीट की गई तो कोई बचाने नहीं आया, जबकि उस वक़्त ट्रेन में और भी यात्री मौजूद थे.
इमरान ने जब इसकी शिकायत पुलिस और TT से की तो उन लोगों ने भी इसे नज़रअंदाज़ किया. इमरान ने अफसरों को दिए बयान में कहा, “मुझे जबरन उठाकर मारने लगे.” उनका इल्ज़ाम है कि सिर्फ दाढ़ी और टोपी पहने होने की वजह से उन्हें निशाना बनाया गया. बीच-बचाव करने पहुंचे उनके एक मुस्लिम मित्र के साथ भी कथित रूप से मारपीट की गई. इमरान ने दावा किया है कि वह हमलावरों की पहचान कर सकते हैं, जिससे जांच में सहायता मिल सकती है.
इमरान ने सरकार से मांग की है कि उन्हें इन्साफ दिया जाए. कसूरवार लोगों को सख्त सजा दी जाए ताकि ऐसे लोगों का मनोबल डाउन हो, वरना कल को ये किसी भी दाढ़ी-टोपी वाले को निशाना बना लेंगे.
ट्रेन में बढ़ रही इन घटनाओं पर Netizens परेशान हैं. वो सवाल कर रहे हैं कि आखिर रेलवे की जिम्मेदारी क्या है. अगर वो अपने मुसाफिरों की भी हिफाज़त नहीं कर सकते हैं तो फिर कौन करेगा? क्या ट्रेन में गुंडा तत्वों के आगे रेलवे या प्रशासन ने घुटने टेक दिए हैं?