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Waqf Property Registration: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (एआईएमएम) के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अनरजिस्टर्ड वक्फ प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेश और वक्फ पोर्टल खोले रखने के वक्त को बढ़ाने की मांग की है.
उन्होंने दलील दी कि कानून में छह महीने का वक्त तय किया गया था, लेकिन फैसला आने में पांच महीने लग गए और अब केवल एक महीना बचा है, इसलिए यह टेन्योर को बढ़ा देना चाहिए. याचिका दाखिल करने के बाद एडवोकेट निजाम पाशा ने उम्मीद जताई है कि इस मामले की सुनवाई अगले हफ्ते होगी. इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले की सुनवाई पर विचार किया जाएगा लेकिन यह मंजूरी नहीं है.
गौरतलब है कि यह संशोधन 18 अप्रैल, 2025 को लागू हुआ था और इसकी अवधि 8 अक्टूबर, 2025 को खत्म हो गई थी. असदुद्दीन ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के फैसले में सफाई की भी मांग की है.
ओवैसी की ओर से एडवोकेट निजाम पाशा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति अजल भटियान और न्यायमूर्ति के. दोड चंद्रा की पीठ के सामने यह याचिका पेश की गई थी. इस दौरान उन्होंने एक शेर भी सुनाया, जो कुछ इस तरह है- उम्रे दराज मांग के लाए थे चार दिन. दो आरजू में गुजर गए, दो इंतजार में.
बता दें, वक्फ अमेंडमेंट एक्ट 2025 का कई मुस्लिम तंज़ीमों ने विरोध किया था. इसके साथ ही अपोज़ीशन पार्टियां भी इसके खिलाफ मुखर थीं. असदुद्दीन ओवैसी ने इस कानून के खिलाफ जेपीसी कमेटी में 100 से ज्यादा पन्नों की एक रिपोर्ट भी पेश की थी. हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि यह कानून वक्फ की जमीन को नियमित करने के लिए लाया गया.