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Pakistan News Today: बीते दिनों पंजाब की रहने वाली सरबजीत नाम की महिला गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव पर बॉर्डर पार कर पाकिस्तान गई थी, लेकिन वह वापस नहीं लौटी. बताया जा रहा है कि उसने सरहद पार कर पाकिस्तानी शख्स से शादी कर ली और अपना धर्म भी बदल लिया है. इससे पहले दावा किया जा रहा था कि सरबजीत का पाकिस्तान में अपहरण हो गया.
वहीं, भारतीय महिला सरबजीत कौर को लेकर चौंकाने वाली खबर सामने आई है. सरबजीत कौर ने इस्लाम धर्म अपनाने के बाद अपना नाम नूर हुसैन रख लिया है. सरबजीत कौर ने लाहौर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. सरबजीत और उनके शौहर ने दावा किया है कि पुलिस उन्हें लगातार परेशान कर रही है और उनकी शादी तोड़ने का दबाव बना रही है. इस उत्पीड़न से तंग आकर दंपति को आखिरकार लाहौर हाई कोर्ट (LHS) का दरवाजा खटखटाना पड़ा है.
सरबजीत कौर पहले सिख थीं. बीते माह 4 नवंबर को 1,922 जायरीनों के एक समूह के साथ अटारी बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान पहुंची थीं. इस समूह ने पाकिस्तान के अलग-अलग गुरुद्वारों में 10 दिन बिताए. ग्रुप के बाकी जायरीन 13 नवंबर की शाम भारत लौट आए, लेकिन सरबजीत लापता हो गई थीं. बाद में उनके निकाहनामे (विवाह प्रमाण पत्र) और पासपोर्ट की प्रति सामने आई, जिससे यह खुलासा हुआ कि उन्होंने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया है और नई आबादी शेखूपुरा निवासी नासिर हुसैन से निकाह कर लिया है.
अब, सरबजीत के शौहर नासिर हुसैन का आरोप है कि लाहौर पुलिस लगातार उन पर शादी तोड़ने का दबाव डाल रही है. दंपति ने लाहौर हाईकोर्ट में एक संयुक्त याचिका दायर की, जिसमें शिकायत की गई है कि पुलिस ने "शेखूपुरा जिले के फारूकाबाद स्थित उनके घर पर अवैध रूप से छापा मारा और इस निकाह को खत्म करने का दबाव डाला."
स्थानीय मीडिया आउटलेट जैसे 'डॉन, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून और 'समा टीवी' के मुताबिक, जस्टिस फारूक हैदर ने इस याचिका पर सुनवाई की.सुनवाई के बादउन्होंने पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं को परेशान करना बंद करें.
मिली जानकारी के मुताबिक, यह याचिका 12 नवंबर को संविधान के अनुच्छेद 199 (हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र) के तहत दायर की गई थी. इसमें सरबजीत और उनके शौहर को याचिकाकर्ता बनाया गया और पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी), शेखपुरा के क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी, शेखपुरा और ननकाना साहिब के जिला पुलिस अधिकारी (डीपीओ), वहां के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) और फारूकाबाद के एक अन्य निवासी को प्रतिवादी बनाया गया है.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरबजीत को उनके पहले के धर्म इस्लाम की वजह से निशाना बनाया जा रह है. हालांकि, उन्होंने सिख धर्म को छोड़कर इस्लाम अपना लिया है, इसके बावजदू किसी ने एसएचओ से याचिकाकर्ताओं के घर पर 8 और 11 नवंबर को दो बार अवैध छापेमारी करने का अनुरोध किया था. इसमें कहा गया है कि एसएचओ का बर्ताव बहुत गैर-जिम्मेदाराना था और इस दौरान उसने शादी तोड़ने का दबाव बनाया.
इसमें यह भी कहा गया कि शौहर पाकिस्तान के नागरिक हैं, जबकि उनकी बीवी ने भी अपने वीजा की अवधि बढ़ाने और पाकिस्तानी नागरिकता हासिल करने के लिए दूतावास से संपर्क किया था. याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादियों की कार्रवाई कानून और मौलिक अधिकारों के खिलाफ है और याचिकाकर्ताओं के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन करती है.
आगे कहा गया है कि अगर अदालत प्रतिवादियों को अनुचित उत्पीड़न करने से रोकने के लिए उचित निर्देश जारी नहीं करती है, तो याचिकाकर्ताओं को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी. लाहौर हाईकोर्ट ने इस याचिका का संज्ञान लेते हुए पुलिस को सरबजीत और उनके शौहर को परेशान न करने की ताकीद की है.